3 फ़रवरी 2025 को सोलापुर का पंचांग

सोमवार, 3 फ़रवरी 2025, सोलापुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 3 फ़रवरी 2025 को सोलापुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (04:37, 4 फ़र॰ तक), नक्षत्र रेवती (23:16 तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 06:58 पर और सूर्यास्त 18:22 पर है। राहुकाल 08:23 से 09:49 तक है।

दिन और रात
दिन 06:58 – 18:22
रात 06:57 तक
तिथि
षष्ठी, 04:37 तक
सप्तमी
नक्षत्र
रेवती, 23:16 तक
अश्विनी
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 फ़रवरी 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 04:37, 4 फ़र॰ तक
शुक्ल सप्तमी 02:31, 5 फ़र॰ तक
नक्षत्र
रेवती 23:16 तक
अश्विनी 21:49, 4 फ़र॰ तक
योग
साध्य 03:02, 4 फ़र॰ तक
शुभ 00:06, 5 फ़र॰ तक
करण
कौलव 17:44 तक
तैतिल 04:37, 4 फ़र॰ तक
गर 15:33, 4 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
मीन 23:16 तक
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:58
सूर्यास्त
18:22
चंद्रोदय
10:20
चंद्रास्त
23:09
दिनमान
11h 24m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:17 – 06:07
अभिजीत मुहूर्त
12:17 – 13:03

अशुभ समय

राहुकाल
08:23 – 09:49
यमगंड
11:14 – 12:40
गुलिक काल
14:05 – 15:31

3 फ़रवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:58 – 08:23शुभ
काल08:23 – 09:49टालें
शुभ09:49 – 11:14शुभ
रोग11:14 – 12:40टालें
उद्वेग12:40 – 14:05टालें
चर14:05 – 15:31सामान्य
लाभ15:31 – 16:56शुभ
अमृत16:56 – 18:22शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:22 – 19:56सामान्य
रोग19:56 – 21:31टालें
काल21:31 – 23:05टालें
लाभ23:05 – 00:40शुभ
उद्वेग00:40 – 02:14टालें
शुभ02:14 – 03:48शुभ
अमृत03:48 – 05:23शुभ
चर05:23 – 06:57सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:5807:55दिन
शनि07:5508:52दिन
गुरु08:5209:49दिन
मंगल09:4910:46दिन
सूर्य10:4611:43दिन
शुक्र11:4312:40दिन
बुध12:4013:37दिन
चंद्र13:3714:34दिन
शनि14:3415:31दिन
गुरु15:3116:28दिन
मंगल16:2817:25दिन
सूर्य17:2518:22दिन
शुक्र18:2219:25रात
बुध19:2520:28रात
चंद्र20:2821:31रात
शनि21:3122:34रात
गुरु22:3423:37रात
मंगल23:3700:40रात
सूर्य00:4001:43रात
शुक्र01:4302:45रात
बुध02:4503:48रात
चंद्र03:4804:51रात
शनि04:5105:54रात
गुरु05:5406:57रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
8 फ़र॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
10 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 फ़र॰ 2025माघ पूर्णिमापूर्णिमा
12 फ़र॰ 2025कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
16 फ़र॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 फ़र॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 फ़र॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 फ़र॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 फ़र॰ 2025फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
3 मार्च 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सोलापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2076° (लाहिड़ी)। समय सोलापुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।