9 अप्रैल 2025 को सोलापुर का पंचांग

बुधवार, 9 अप्रैल 2025, सोलापुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 9 अप्रैल 2025 को सोलापुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (22:56 तक), नक्षत्र मघा (09:57 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 06:14 पर और सूर्यास्त 18:41 पर है। राहुकाल 12:28 से 14:01 तक है।

दिन और रात
दिन 06:14 – 18:41
रात 06:13 तक
तिथि
द्वादशी, 22:56 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
मघा, 09:57 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 अप्रैल 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 22:56 तक
शुक्ल त्रयोदशी 01:01, 11 अप्रैल तक
नक्षत्र
मघा 09:57 तक
पूर्वा फाल्गुनी 12:24, 10 अप्रैल तक
योग
गंडअशुभ 18:25 तक
वृद्धि 18:58, 10 अप्रैल तक
करण
बव 10:01 तक
बालव 22:56 तक
कौलव 11:56, 10 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:14
सूर्यास्त
18:41
चंद्रोदय
15:54
चंद्रास्त
03:59
दिनमान
12h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:42 – 05:28
अभिजीत मुहूर्त
12:03 – 12:52 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:28 – 14:01
यमगंड
07:48 – 09:21
गुलिक काल
10:54 – 12:28

9 अप्रैल 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:14 – 07:48शुभ
अमृत07:48 – 09:21शुभ
काल09:21 – 10:54टालें
शुभ10:54 – 12:28शुभ
रोग12:28 – 14:01टालें
उद्वेग14:01 – 15:34टालें
चर15:34 – 17:08सामान्य
लाभ17:08 – 18:41शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:41 – 20:07टालें
शुभ20:07 – 21:34शुभ
अमृत21:34 – 23:01शुभ
चर23:01 – 00:27सामान्य
रोग00:27 – 01:54टालें
काल01:54 – 03:20टालें
लाभ03:20 – 04:47शुभ
उद्वेग04:47 – 06:13टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:1407:16दिन
चंद्र07:1608:19दिन
शनि08:1909:21दिन
गुरु09:2110:23दिन
मंगल10:2311:25दिन
सूर्य11:2512:28दिन
शुक्र12:2813:30दिन
बुध13:3014:32दिन
चंद्र14:3215:34दिन
शनि15:3416:36दिन
गुरु16:3617:39दिन
मंगल17:3918:41दिन
सूर्य18:4119:39रात
शुक्र19:3920:36रात
बुध20:3621:34रात
चंद्र21:3422:32रात
शनि22:3223:29रात
गुरु23:2900:27रात
मंगल00:2701:25रात
सूर्य01:2502:23रात
शुक्र02:2303:20रात
बुध03:2004:18रात
चंद्र04:1805:16रात
शनि05:1606:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 अप्रैल 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
12 अप्रैल 2025चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
14 अप्रैल 2025मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
21 अप्रैल 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
24 अप्रैल 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
26 अप्रैल 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
27 अप्रैल 2025वैशाख अमावस्याअमावस्या
1 मई 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
8 मई 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां सोलापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2101° (लाहिड़ी)। समय सोलापुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।