16 फ़रवरी 2026 को सोलापुर का पंचांग

सोमवार, 16 फ़रवरी 2026, सोलापुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 16 फ़रवरी 2026 को सोलापुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण चतुर्दशी (17:34 तक), नक्षत्र श्रवण (20:48 तक) और योग वरीयान है। सूर्योदय 06:52 पर और सूर्यास्त 18:28 पर है। राहुकाल 08:19 से 09:46 तक है।

दिन और रात
दिन 06:52 – 18:28
रात 06:52 तक
तिथि
चतुर्दशी, 17:34 तक
अमावस्या
नक्षत्र
श्रवण, 20:48 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 फ़रवरी 2026 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण चतुर्दशी 17:34 तक
अमावस्या 17:31, 17 फ़र॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 20:48 तक
धनिष्ठा 21:16, 17 फ़र॰ तक
योग
वरीयान 01:50, 17 फ़र॰ तक
परिघअशुभ 00:28, 18 फ़र॰ तक
करण
शकुनि 17:34 तक
चतुष्पद 05:36, 17 फ़र॰ तक
नाग 17:31, 17 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:52
सूर्यास्त
18:28
चंद्रोदय
06:01
चंद्रास्त
17:31
दिनमान
11h 35m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:13 – 06:03
अभिजीत मुहूर्त
12:17 – 13:03

अशुभ समय

राहुकाल
08:19 – 09:46
यमगंड
11:13 – 12:40
गुलिक काल
14:07 – 15:34

16 फ़रवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:52 – 08:19शुभ
काल08:19 – 09:46टालें
शुभ09:46 – 11:13शुभ
रोग11:13 – 12:40टालें
उद्वेग12:40 – 14:07टालें
चर14:07 – 15:34सामान्य
लाभ15:34 – 17:01शुभ
अमृत17:01 – 18:28शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:28 – 20:01सामान्य
रोग20:01 – 21:34टालें
काल21:34 – 23:07टालें
लाभ23:07 – 00:40शुभ
उद्वेग00:40 – 02:13टालें
शुभ02:13 – 03:46शुभ
अमृत03:46 – 05:19शुभ
चर05:19 – 06:52सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:5207:50दिन
शनि07:5008:48दिन
गुरु08:4809:46दिन
मंगल09:4610:44दिन
सूर्य10:4411:42दिन
शुक्र11:4212:40दिन
बुध12:4013:38दिन
चंद्र13:3814:36दिन
शनि14:3615:34दिन
गुरु15:3416:32दिन
मंगल16:3217:30दिन
सूर्य17:3018:28दिन
शुक्र18:2819:30रात
बुध19:3020:32रात
चंद्र20:3221:34रात
शनि21:3422:36रात
गुरु22:3623:38रात
मंगल23:3800:40रात
सूर्य00:4001:42रात
शुक्र01:4202:44रात
बुध02:4403:46रात
चंद्र03:4604:48रात
शनि04:4805:50रात
गुरु05:5006:52रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 फ़र॰ 2026फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
21 फ़र॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 फ़र॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 मार्च 2026फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
7 मार्च 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 मार्च 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 मार्च 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 मार्च 2026मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
17 मार्च 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां सोलापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2220° (लाहिड़ी)। समय सोलापुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।