12 जनवरी 2027 को सोलापुर का पंचांग

मंगलवार, 12 जनवरी 2027, सोलापुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 12 जनवरी 2027 को सोलापुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (11:29 तक), नक्षत्र शतभिषा (20:14 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 06:59 पर और सूर्यास्त 18:09 पर है। राहुकाल 15:21 से 16:45 तक है।

दिन और रात
दिन 06:59 – 18:09
रात 06:59 तक
तिथि
चतुर्थी, 11:29 तक
पंचमी
नक्षत्र
शतभिषा, 20:14 तक
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 जनवरी 2027 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 11:29 तक
शुक्ल पंचमी 13:02, 13 जन॰ तक
नक्षत्र
शतभिषा 20:14 तक
पूर्वा भाद्रपद 22:04, 13 जन॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 17:57 तक
वरीयान 17:54, 13 जन॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 11:29 तक
बव 00:20, 13 जन॰ तक
बालव 13:02, 13 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:59
सूर्यास्त
18:09
चंद्रोदय
09:49
चंद्रास्त
21:54
दिनमान
11h 10m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:16 – 06:08
अभिजीत मुहूर्त
12:12 – 12:56

अशुभ समय

राहुकाल
15:21 – 16:45
यमगंड
09:47 – 11:10
गुलिक काल
12:34 – 13:58

12 जनवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:59 – 08:23टालें
उद्वेग08:23 – 09:47टालें
चर09:47 – 11:10सामान्य
लाभ11:10 – 12:34शुभ
अमृत12:34 – 13:58शुभ
काल13:58 – 15:21टालें
शुभ15:21 – 16:45शुभ
रोग16:45 – 18:09टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:09 – 19:45टालें
लाभ19:45 – 21:21शुभ
उद्वेग21:21 – 22:58टालें
शुभ22:58 – 00:34शुभ
अमृत00:34 – 02:10शुभ
चर02:10 – 03:47सामान्य
रोग03:47 – 05:23टालें
काल05:23 – 06:59टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:5907:55दिन
सूर्य07:5508:51दिन
शुक्र08:5109:47दिन
बुध09:4710:42दिन
चंद्र10:4211:38दिन
शनि11:3812:34दिन
गुरु12:3413:30दिन
मंगल13:3014:26दिन
सूर्य14:2615:21दिन
शुक्र15:2116:17दिन
बुध16:1717:13दिन
चंद्र17:1318:09दिन
शनि18:0919:13रात
गुरु19:1320:17रात
मंगल20:1721:21रात
सूर्य21:2122:26रात
शुक्र22:2623:30रात
बुध23:3000:34रात
चंद्र00:3401:38रात
शनि01:3802:43रात
गुरु02:4303:47रात
मंगल03:4704:51रात
सूर्य04:5105:55रात
शुक्र05:5506:59रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 जन॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
14 जन॰ 2027मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
19 जन॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 जन॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 जन॰ 2027पौष पूर्णिमापूर्णिमा
25 जन॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 जन॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
2 फ़र॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 फ़र॰ 2027माघ अमावस्याअमावस्या
10 फ़र॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सोलापुर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2346° (लाहिड़ी)। समय सोलापुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।