18 अक्टूबर 2025 को श्रीनगर का पंचांग

शनिवार, 18 अक्टूबर 2025, श्रीनगर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 18 अक्टूबर 2025 को श्रीनगर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (12:19 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (15:41 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 06:38 पर और सूर्यास्त 17:53 पर है। राहुकाल 09:26 से 10:51 तक है।

दिन और रात
दिन 06:38 – 17:53
रात 06:39 तक
तिथि
द्वादशी, 12:19 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 15:41 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 12:19 तक
कृष्ण त्रयोदशी 13:52, 19 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 17:49, 19 अक्टू॰ तक
योग
ब्रह्म 01:48, 19 अक्टू॰ तक
इंद्र 02:04, 20 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 12:19 तक
गर 01:03, 19 अक्टू॰ तक
वणिज 13:52, 19 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 22:11 तक
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:38
सूर्यास्त
17:53
चंद्रोदय
03:31
चंद्रास्त
16:17
दिनमान
11h 15m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:56 – 05:47
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:38

अशुभ समय

राहुकाल
09:26 – 10:51
यमगंड
13:40 – 15:04
गुलिक काल
06:38 – 08:02

18 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:38 – 08:02टालें
शुभ08:02 – 09:26शुभ
रोग09:26 – 10:51टालें
उद्वेग10:51 – 12:15टालें
चर12:15 – 13:40सामान्य
लाभ13:40 – 15:04शुभ
अमृत15:04 – 16:28शुभ
काल16:28 – 17:53टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:53 – 19:28शुभ
उद्वेग19:28 – 21:04टालें
शुभ21:04 – 22:40शुभ
अमृत22:40 – 00:16शुभ
चर00:16 – 01:51सामान्य
रोग01:51 – 03:27टालें
काल03:27 – 05:03टालें
लाभ05:03 – 06:39शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:3807:34दिन
गुरु07:3408:30दिन
मंगल08:3009:26दिन
सूर्य09:2610:23दिन
शुक्र10:2311:19दिन
बुध11:1912:15दिन
चंद्र12:1513:11दिन
शनि13:1114:08दिन
गुरु14:0815:04दिन
मंगल15:0416:00दिन
सूर्य16:0016:56दिन
शुक्र16:5617:53दिन
बुध17:5318:56रात
चंद्र18:5620:00रात
शनि20:0021:04रात
गुरु21:0422:08रात
मंगल22:0823:12रात
सूर्य23:1200:16रात
शुक्र00:1601:19रात
बुध01:1902:23रात
चंद्र02:2303:27रात
शनि03:2704:31रात
गुरु04:3105:35रात
मंगल05:3506:39रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
19 अक्टू॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
21 अक्टू॰ 2025कार्तिक अमावस्याअमावस्या
25 अक्टू॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
2 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
3 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
8 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश

तिथियां श्रीनगर में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2174° (लाहिड़ी)। समय श्रीनगर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।