4 मार्च 2026 को सुवा का पंचांग

बुधवार, 4 मार्च 2026, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

बुधवार, 4 मार्च 2026 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (23:19 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (14:09 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 06:05 पर और सूर्यास्त 18:29 पर है। राहुकाल 12:17 से 13:50 तक है।

दिन और रात
दिन 06:05 – 18:29
रात 06:06 तक
तिथि
प्रतिपदा, 23:19 तक
द्वितीया
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 14:09 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 मार्च 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 23:19 तक
कृष्ण द्वितीया 23:34, 5 मार्च तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 14:47, 5 मार्च तक
योग
धृति 15:22 तक
शूलअशुभ 14:15, 5 मार्च तक
करण
बालव 11:24 तक
कौलव 23:19 तक
तैतिल 11:22, 5 मार्च तक
चंद्र राशि
सिंह 20:15 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:05
सूर्यास्त
18:29
चंद्रोदय
18:54
चंद्रास्त
06:23
दिनमान
12h 24m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:33 – 05:19
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:42 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:17 – 13:50
यमगंड
07:38 – 09:11
गुलिक काल
10:44 – 12:17

4 मार्च 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:05 – 07:38शुभ
अमृत07:38 – 09:11शुभ
काल09:11 – 10:44टालें
शुभ10:44 – 12:17शुभ
रोग12:17 – 13:50टालें
उद्वेग13:50 – 15:23टालें
चर15:23 – 16:56सामान्य
लाभ16:56 – 18:29शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:29 – 19:57टालें
शुभ19:57 – 21:24शुभ
अमृत21:24 – 22:51शुभ
चर22:51 – 00:18सामान्य
रोग00:18 – 01:45टालें
काल01:45 – 03:12टालें
लाभ03:12 – 04:39शुभ
उद्वेग04:39 – 06:06टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:0507:07दिन
चंद्र07:0708:09दिन
शनि08:0909:11दिन
गुरु09:1110:13दिन
मंगल10:1311:15दिन
सूर्य11:1512:17दिन
शुक्र12:1713:19दिन
बुध13:1914:21दिन
चंद्र14:2115:23दिन
शनि15:2316:25दिन
गुरु16:2517:27दिन
मंगल17:2718:29दिन
सूर्य18:2919:28रात
शुक्र19:2820:26रात
बुध20:2621:24रात
चंद्र21:2422:22रात
शनि22:2223:20रात
गुरु23:2000:18रात
मंगल00:1801:16रात
सूर्य01:1602:14रात
शुक्र02:1403:12रात
बुध03:1204:10रात
चंद्र04:1005:08रात
शनि05:0806:06रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
7 मार्च 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 मार्च 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 मार्च 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
15 मार्च 2026मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
17 मार्च 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
19 मार्च 2026चैत्र अमावस्याअमावस्या
22 मार्च 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 मार्च 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
31 मार्च 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
2 अप्रैल 2026चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2226° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।