31 जनवरी 2028 को सुवा का पंचांग

सोमवार, 31 जनवरी 2028, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

सोमवार, 31 जनवरी 2028 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (13:45 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (11:31 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 05:51 पर और सूर्यास्त 18:47 पर है। राहुकाल 07:28 से 09:05 तक है।

दिन और रात
दिन 05:51 – 18:47
रात 05:52 तक
तिथि
चतुर्थी, 13:45 तक
पंचमी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 11:31 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 जनवरी 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 13:45 तक
शुक्ल पंचमी 15:58, 1 फ़र॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 14:12, 1 फ़र॰ तक
योग
शिव 00:27, 1 फ़र॰ तक
सिद्ध 00:54, 2 फ़र॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 13:45 तक
बव 02:54, 1 फ़र॰ तक
बालव 15:58, 1 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:51
सूर्यास्त
18:47
चंद्रोदय
09:11
चंद्रास्त
21:20
दिनमान
12h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
माघ
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:23 – 05:07
अभिजीत मुहूर्त
11:53 – 12:45

अशुभ समय

राहुकाल
07:28 – 09:05
यमगंड
10:42 – 12:19
गुलिक काल
13:56 – 15:33

31 जनवरी 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:51 – 07:28शुभ
काल07:28 – 09:05टालें
शुभ09:05 – 10:42शुभ
रोग10:42 – 12:19टालें
उद्वेग12:19 – 13:56टालें
चर13:56 – 15:33सामान्य
लाभ15:33 – 17:10शुभ
अमृत17:10 – 18:47शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:47 – 20:10सामान्य
रोग20:10 – 21:33टालें
काल21:33 – 22:56टालें
लाभ22:56 – 00:19शुभ
उद्वेग00:19 – 01:42टालें
शुभ01:42 – 03:06शुभ
अमृत03:06 – 04:29शुभ
चर04:29 – 05:52सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:5106:56दिन
शनि06:5608:01दिन
गुरु08:0109:05दिन
मंगल09:0510:10दिन
सूर्य10:1011:14दिन
शुक्र11:1412:19दिन
बुध12:1913:24दिन
चंद्र13:2414:28दिन
शनि14:2815:33दिन
गुरु15:3316:37दिन
मंगल16:3717:42दिन
सूर्य17:4218:47दिन
शुक्र18:4719:42रात
बुध19:4220:37रात
चंद्र20:3721:33रात
शनि21:3322:28रात
गुरु22:2823:24रात
मंगल23:2400:19रात
सूर्य00:1901:15रात
शुक्र01:1502:10रात
बुध02:1003:06रात
चंद्र03:0604:01रात
शनि04:0104:57रात
गुरु04:5705:52रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 जन॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
7 फ़र॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
9 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
10 फ़र॰ 2028माघ पूर्णिमापूर्णिमा
13 फ़र॰ 2028कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
14 फ़र॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
18 फ़र॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 फ़र॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
23 फ़र॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 फ़र॰ 2028फाल्गुन अमावस्याअमावस्या
29 फ़र॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2493° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।