11 मार्च 2028 को सुवा का पंचांग

शनिवार, 11 मार्च 2028, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

शनिवार, 11 मार्च 2028 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि पूर्णिमा (13:06 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (12:59 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 06:07 पर और सूर्यास्त 18:24 पर है। राहुकाल 09:12 से 10:44 तक है।

दिन और रात
दिन 06:07 – 18:24
रात 06:08 तक
तिथि
पूर्णिमा, 13:06 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 12:59 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 मार्च 2028 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
पूर्णिमा 13:06 तक
कृष्ण प्रतिपदा 09:26, 12 मार्च तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 10:07, 12 मार्च तक
योग
शूलअशुभ 22:47 तक
गंडअशुभ 18:41, 12 मार्च तक
करण
बव 13:06 तक
बालव 23:14 तक
कौलव 09:26, 12 मार्च तक
चंद्र राशि
सिंह 18:15 तक
सूर्य राशिकुंभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:07
सूर्यास्त
18:24
चंद्रोदय
18:19
चंद्रास्त
05:51
दिनमान
12h 16m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:34 – 05:21
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:40

अशुभ समय

राहुकाल
09:12 – 10:44
यमगंड
13:48 – 15:20
गुलिक काल
06:07 – 07:40

11 मार्च 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:07 – 07:40टालें
शुभ07:40 – 09:12शुभ
रोग09:12 – 10:44टालें
उद्वेग10:44 – 12:16टालें
चर12:16 – 13:48सामान्य
लाभ13:48 – 15:20शुभ
अमृत15:20 – 16:52शुभ
काल16:52 – 18:24टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:24 – 19:52शुभ
उद्वेग19:52 – 21:20टालें
शुभ21:20 – 22:48शुभ
अमृत22:48 – 00:16शुभ
चर00:16 – 01:44सामान्य
रोग01:44 – 03:12टालें
काल03:12 – 04:40टालें
लाभ04:40 – 06:08शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:0707:09दिन
गुरु07:0908:10दिन
मंगल08:1009:12दिन
सूर्य09:1210:13दिन
शुक्र10:1311:14दिन
बुध11:1412:16दिन
चंद्र12:1613:17दिन
शनि13:1714:18दिन
गुरु14:1815:20दिन
मंगल15:2016:21दिन
सूर्य16:2117:22दिन
शुक्र17:2218:24दिन
बुध18:2419:22रात
चंद्र19:2220:21रात
शनि20:2121:20रात
गुरु21:2022:18रात
मंगल22:1823:17रात
सूर्य23:1700:16रात
शुक्र00:1601:14रात
बुध01:1402:13रात
चंद्र02:1303:12रात
शनि03:1204:10रात
गुरु04:1005:09रात
मंगल05:0906:08रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 मार्च 2028फाल्गुन पूर्णिमापूर्णिमा
14 मार्च 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 मार्च 2028मीन संक्रांतिसूर्य का मीन में प्रवेश
18 मार्च 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
21 मार्च 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
24 मार्च 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
26 मार्च 2028चैत्र अमावस्याअमावस्या
30 मार्च 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
6 अप्रैल 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अप्रैल 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अप्रैल 2028चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2509° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।