3 अप्रैल 2028 को सुवा का पंचांग

सोमवार, 3 अप्रैल 2028, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

सोमवार, 3 अप्रैल 2028 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल अष्टमी (18:30 तक), नक्षत्र आर्द्रा (08:27 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:13 पर और सूर्यास्त 18:05 पर है। राहुकाल 07:42 से 09:11 तक है।

दिन और रात
दिन 06:13 – 18:05
रात 06:13 तक
तिथि
अष्टमी, 18:30 तक
नवमी
नक्षत्र
पुनर्वसु
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 अप्रैल 2028 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल अष्टमी 18:30 तक
शुक्ल नवमी 16:37, 4 अप्रैल तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 07:30, 4 अप्रैल तक
योग
अतिगंडअशुभ 01:40, 4 अप्रैल तक
सुकर्मा 22:53, 4 अप्रैल तक
करण
विष्टि (भद्रा) 07:15 तक
बव 18:30 तक
बालव 05:38, 4 अप्रैल तक
कौलव 16:37, 4 अप्रैल तक
चंद्र राशि
मिथुन 01:47, 4 अप्रैल तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:13
सूर्यास्त
18:05
चंद्रोदय
13:05
चंद्रास्त
इस दिन चंद्रास्त नहीं
दिनमान
11h 53m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:36 – 05:24
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:33

अशुभ समय

राहुकाल
07:42 – 09:11
यमगंड
10:40 – 12:09
गुलिक काल
13:38 – 15:07

3 अप्रैल 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:13 – 07:42शुभ
काल07:42 – 09:11टालें
शुभ09:11 – 10:40शुभ
रोग10:40 – 12:09टालें
उद्वेग12:09 – 13:38टालें
चर13:38 – 15:07सामान्य
लाभ15:07 – 16:36शुभ
अमृत16:36 – 18:05शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:05 – 19:36सामान्य
रोग19:36 – 21:07टालें
काल21:07 – 22:38टालें
लाभ22:38 – 00:09शुभ
उद्वेग00:09 – 01:40टालें
शुभ01:40 – 03:11शुभ
अमृत03:11 – 04:42शुभ
चर04:42 – 06:13सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:1307:12दिन
शनि07:1208:11दिन
गुरु08:1109:11दिन
मंगल09:1110:10दिन
सूर्य10:1011:10दिन
शुक्र11:1012:09दिन
बुध12:0913:08दिन
चंद्र13:0814:08दिन
शनि14:0815:07दिन
गुरु15:0716:06दिन
मंगल16:0617:06दिन
सूर्य17:0618:05दिन
शुक्र18:0519:06रात
बुध19:0620:07रात
चंद्र20:0721:07रात
शनि21:0722:08रात
गुरु22:0823:08रात
मंगल23:0800:09रात
सूर्य00:0901:10रात
शुक्र01:1002:10रात
बुध02:1003:11रात
चंद्र03:1104:12रात
शनि04:1205:12रात
गुरु05:1206:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 अप्रैल 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
7 अप्रैल 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
9 अप्रैल 2028चैत्र पूर्णिमापूर्णिमा
13 अप्रैल 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
14 अप्रैल 2028मेष संक्रांतिसूर्य का मेष में प्रवेश
17 अप्रैल 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
20 अप्रैल 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
22 अप्रैल 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
25 अप्रैल 2028वैशाख अमावस्याअमावस्या
29 अप्रैल 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2517° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।