10 सितंबर 2028 को सुवा का पंचांग

रविवार, 10 सितंबर 2028, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

रविवार, 10 सितंबर 2028 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (23:59 तक), नक्षत्र कृत्तिका (07:34, 11 सित॰ तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 06:06 पर और सूर्यास्त 18:00 पर है। राहुकाल 16:31 से 18:00 तक है।

दिन और रात
दिन 06:06 – 18:00
रात 06:05 तक
तिथि
षष्ठी, 23:59 तक
सप्तमी
नक्षत्र
कृत्तिका
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

10 सितंबर 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 23:59 तक
कृष्ण सप्तमी 00:40, 12 सित॰ तक
नक्षत्र
कृत्तिका 07:34, 11 सित॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 11:54 तक
हर्षण 11:40, 11 सित॰ तक
करण
गर 11:25 तक
वणिज 23:59 तक
विष्टि (भद्रा) 12:24, 11 सित॰ तक
चंद्र राशि
मेष 12:20 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:06
सूर्यास्त
18:00
चंद्रोदय
23:07
चंद्रास्त
09:33
दिनमान
11h 54m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:29 – 05:17
अभिजीत मुहूर्त
11:39 – 12:27

अशुभ समय

राहुकाल
16:31 – 18:00
यमगंड
12:03 – 13:32
गुलिक काल
15:01 – 16:31

10 सितंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:06 – 07:35टालें
चर07:35 – 09:04सामान्य
लाभ09:04 – 10:34शुभ
अमृत10:34 – 12:03शुभ
काल12:03 – 13:32टालें
शुभ13:32 – 15:01शुभ
रोग15:01 – 16:31टालें
उद्वेग16:31 – 18:00टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:00 – 19:31शुभ
अमृत19:31 – 21:01शुभ
चर21:01 – 22:32सामान्य
रोग22:32 – 00:02टालें
काल00:02 – 01:33टालें
लाभ01:33 – 03:04शुभ
उद्वेग03:04 – 04:34टालें
शुभ04:34 – 06:05शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:0607:05दिन
शुक्र07:0508:05दिन
बुध08:0509:04दिन
चंद्र09:0410:04दिन
शनि10:0411:03दिन
गुरु11:0312:03दिन
मंगल12:0313:02दिन
सूर्य13:0214:02दिन
शुक्र14:0215:01दिन
बुध15:0116:01दिन
चंद्र16:0117:00दिन
शनि17:0018:00दिन
गुरु18:0019:00रात
मंगल19:0020:01रात
सूर्य20:0121:01रात
शुक्र21:0122:02रात
बुध22:0223:02रात
चंद्र23:0200:02रात
शनि00:0201:03रात
गुरु01:0302:03रात
मंगल02:0303:04रात
सूर्य03:0404:04रात
शुक्र04:0405:05रात
बुध05:0506:05रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
12 सित॰ 2028कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
15 सित॰ 2028कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
17 सित॰ 2028प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
17 सित॰ 2028कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
19 सित॰ 2028आश्विन अमावस्याअमावस्या
22 सित॰ 2028विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 सित॰ 2028शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 अक्टू॰ 2028प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 अक्टू॰ 2028आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
8 अक्टू॰ 2028संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2579° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।