6 अक्टूबर 2029 को सुवा का पंचांग

शनिवार, 6 अक्टूबर 2029, सुवा, फ़िजी। समय Pacific/Fiji में है।

शनिवार, 6 अक्टूबर 2029 को सुवा में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (14:21 तक), नक्षत्र पूर्वा फाल्गुनी (17:17 तक) और योग शुक्ल है। सूर्योदय 05:44 पर और सूर्यास्त 18:04 पर है। राहुकाल 08:49 से 10:22 तक है।

दिन और रात
दिन 05:44 – 18:04
रात 05:43 तक
तिथि
त्रयोदशी, 14:21 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पूर्वा फाल्गुनी, 17:17 तक
उत्तरा फाल्गुनी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 अक्टूबर 2029 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 14:21 तक
कृष्ण चतुर्दशी 10:56, 7 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी 14:36, 7 अक्टू॰ तक
योग
शुक्ल 23:52 तक
ब्रह्म 19:47, 7 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 14:21 तक
विष्टि (भद्रा) 00:41, 7 अक्टू॰ तक
शकुनि 10:56, 7 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सिंह 22:39 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:44
सूर्यास्त
18:04
चंद्रोदय
04:00
चंद्रास्त
16:22
दिनमान
12h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:11 – 04:57
अभिजीत मुहूर्त
11:29 – 12:19

अशुभ समय

राहुकाल
08:49 – 10:22
यमगंड
13:27 – 14:59
गुलिक काल
05:44 – 07:16

6 अक्टूबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:44 – 07:16टालें
शुभ07:16 – 08:49शुभ
रोग08:49 – 10:22टालें
उद्वेग10:22 – 11:54टालें
चर11:54 – 13:27सामान्य
लाभ13:27 – 14:59शुभ
अमृत14:59 – 16:32शुभ
काल16:32 – 18:04टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:04 – 19:32शुभ
उद्वेग19:32 – 20:59टालें
शुभ20:59 – 22:26शुभ
अमृत22:26 – 23:54शुभ
चर23:54 – 01:21सामान्य
रोग01:21 – 02:48टालें
काल02:48 – 04:16टालें
लाभ04:16 – 05:43शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:4406:46दिन
गुरु06:4607:47दिन
मंगल07:4708:49दिन
सूर्य08:4909:51दिन
शुक्र09:5110:52दिन
बुध10:5211:54दिन
चंद्र11:5412:56दिन
शनि12:5613:57दिन
गुरु13:5714:59दिन
मंगल14:5916:01दिन
सूर्य16:0117:03दिन
शुक्र17:0318:04दिन
बुध18:0419:03रात
चंद्र19:0320:01रात
शनि20:0120:59रात
गुरु20:5921:57रात
मंगल21:5722:55रात
सूर्य22:5523:54रात
शुक्र23:5400:52रात
बुध00:5201:50रात
चंद्र01:5002:48रात
शनि02:4803:47रात
गुरु03:4704:45रात
मंगल04:4505:43रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
6 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 अक्टू॰ 2029आश्विन अमावस्याअमावस्या
11 अक्टू॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 अक्टू॰ 2029तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
18 अक्टू॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
20 अक्टू॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
22 अक्टू॰ 2029आश्विन पूर्णिमापूर्णिमा
26 अक्टू॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
31 अक्टू॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 नव॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 नव॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां सुवा में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2728° (लाहिड़ी)। समय सुवा (Pacific/Fiji) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।