2 नवंबर 2025 को सिडनी का पंचांग

रविवार, 2 नवंबर 2025, सिडनी, ऑस्ट्रेलिया। समय Australia/Sydney में है।

रविवार, 2 नवंबर 2025 को सिडनी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (13:02 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (22:33 तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 05:53 पर और सूर्यास्त 19:24 पर है। राहुकाल 17:42 से 19:24 तक है।

दिन और रात
दिन 05:53 – 19:24
रात 05:53 तक
तिथि
एकादशी, 13:02 तक
द्वादशी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 22:33 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 नवंबर 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 13:02 तक
शुक्ल द्वादशी 10:37, 3 नव॰ तक
नक्षत्र
योग
ध्रुव 07:39 तक
व्याघातअशुभ 04:40, 3 नव॰ तक
हर्षण 01:09, 4 नव॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 13:02 तक
बव 23:55 तक
बालव 10:37, 3 नव॰ तक
चंद्र राशि
कुंभ 16:57 तक
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:53
सूर्यास्त
19:24
चंद्रोदय
15:38
चंद्रास्त
03:34
दिनमान
13h 30m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:29 – 05:11
अभिजीत मुहूर्त
12:11 – 13:05

अशुभ समय

राहुकाल
17:42 – 19:24
यमगंड
12:38 – 14:20
गुलिक काल
16:01 – 17:42

2 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:53 – 07:35टालें
चर07:35 – 09:16सामान्य
लाभ09:16 – 10:57शुभ
अमृत10:57 – 12:38शुभ
काल12:38 – 14:20टालें
शुभ14:20 – 16:01शुभ
रोग16:01 – 17:42टालें
उद्वेग17:42 – 19:24टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ19:24 – 20:42शुभ
अमृत20:42 – 22:01शुभ
चर22:01 – 23:19सामान्य
रोग23:19 – 00:38टालें
काल00:38 – 01:57टालें
लाभ01:57 – 03:15शुभ
उद्वेग03:15 – 04:34टालें
शुभ04:34 – 05:53शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:5307:01दिन
शुक्र07:0108:08दिन
बुध08:0809:16दिन
चंद्र09:1610:23दिन
शनि10:2311:31दिन
गुरु11:3112:38दिन
मंगल12:3813:46दिन
सूर्य13:4614:54दिन
शुक्र14:5416:01दिन
बुध16:0117:09दिन
चंद्र17:0918:16दिन
शनि18:1619:24दिन
गुरु19:2420:16रात
मंगल20:1621:08रात
सूर्य21:0822:01रात
शुक्र22:0122:53रात
बुध22:5323:46रात
चंद्र23:4600:38रात
शनि00:3801:30रात
गुरु01:3002:23रात
मंगल02:2303:15रात
सूर्य03:1504:08रात
शुक्र04:0805:00रात
बुध05:0005:53रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 नव॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
4 नव॰ 2025प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
5 नव॰ 2025कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा
9 नव॰ 2025संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
12 नव॰ 2025कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
16 नव॰ 2025कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
16 नव॰ 2025वृश्चिक संक्रांतिसूर्य का वृश्चिक में प्रवेश
18 नव॰ 2025प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
20 नव॰ 2025मार्गशीर्ष अमावस्याअमावस्या
24 नव॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
1 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां सिडनी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2180° (लाहिड़ी)। समय सिडनी (Australia/Sydney) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।