16 अक्टूबर 2027 को ठाणे का पंचांग

शनिवार, 16 अक्टूबर 2027, ठाणे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 16 अक्टूबर 2027 को ठाणे में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण प्रतिपदा (19:13 तक), नक्षत्र अश्विनी (23:59 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 06:32 पर और सूर्यास्त 18:14 पर है। राहुकाल 09:28 से 10:55 तक है।

दिन और रात
दिन 06:32 – 18:14
रात 06:32 तक
तिथि
प्रतिपदा, 19:13 तक
द्वितीया
नक्षत्र
अश्विनी, 23:59 तक
भरणी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 अक्टूबर 2027 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण प्रतिपदा 19:13 तक
कृष्ण द्वितीया 18:43, 17 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
भरणी 00:03, 18 अक्टू॰ तक
योग
हर्षण 14:29 तक
वज्रअशुभ 13:03, 17 अक्टू॰ तक
करण
बालव 07:18 तक
कौलव 19:13 तक
तैतिल 07:01, 17 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:32
सूर्यास्त
18:14
चंद्रोदय
18:36
चंद्रास्त
07:00
दिनमान
11h 42m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:54 – 05:43
अभिजीत मुहूर्त
12:00 – 12:47

अशुभ समय

राहुकाल
09:28 – 10:55
यमगंड
13:51 – 15:19
गुलिक काल
06:32 – 08:00

16 अक्टूबर 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:32 – 08:00टालें
शुभ08:00 – 09:28शुभ
रोग09:28 – 10:55टालें
उद्वेग10:55 – 12:23टालें
चर12:23 – 13:51सामान्य
लाभ13:51 – 15:19शुभ
अमृत15:19 – 16:47शुभ
काल16:47 – 18:14टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:14 – 19:47शुभ
उद्वेग19:47 – 21:19टालें
शुभ21:19 – 22:51शुभ
अमृत22:51 – 00:23शुभ
चर00:23 – 01:56सामान्य
रोग01:56 – 03:28टालें
काल03:28 – 05:00टालें
लाभ05:00 – 06:32शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:3207:31दिन
गुरु07:3108:29दिन
मंगल08:2909:28दिन
सूर्य09:2810:26दिन
शुक्र10:2611:25दिन
बुध11:2512:23दिन
चंद्र12:2313:22दिन
शनि13:2214:20दिन
गुरु14:2015:19दिन
मंगल15:1916:17दिन
सूर्य16:1717:16दिन
शुक्र17:1618:14दिन
बुध18:1419:16रात
चंद्र19:1620:17रात
शनि20:1721:19रात
गुरु21:1922:20रात
मंगल22:2023:22रात
सूर्य23:2200:23रात
शुक्र00:2301:25रात
बुध01:2502:26रात
चंद्र02:2603:28रात
शनि03:2804:29रात
गुरु04:2905:31रात
मंगल05:3106:32रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
18 अक्टू॰ 2027तुला संक्रांतिसूर्य का तुला में प्रवेश
19 अक्टू॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 अक्टू॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
25 अक्टू॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
27 अक्टू॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
29 अक्टू॰ 2027कार्तिक अमावस्याअमावस्या
2 नव॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
10 नव॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
12 नव॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
14 नव॰ 2027कार्तिक पूर्णिमापूर्णिमा

तिथियां ठाणे में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2452° (लाहिड़ी)। समय ठाणे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।