24 दिसंबर 2025 को वाराणसी का पंचांग

बुधवार, 24 दिसंबर 2025, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 24 दिसंबर 2025 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (13:11 तक), नक्षत्र श्रवण (07:07 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 06:40 पर और सूर्यास्त 17:14 पर है। राहुकाल 11:57 से 13:16 तक है।

दिन और रात
दिन 06:40 – 17:14
रात 06:41 तक
तिथि
चतुर्थी, 13:11 तक
पंचमी
नक्षत्र
धनिष्ठा
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 दिसंबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 13:11 तक
शुक्ल पंचमी 13:43, 25 दिस॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 07:07 तक
धनिष्ठा 08:18, 25 दिस॰ तक
योग
हर्षण 16:02 तक
वज्रअशुभ 15:13, 25 दिस॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 13:11 तक
बव 01:31, 25 दिस॰ तक
बालव 13:43, 25 दिस॰ तक
चंद्र राशि
मकर 19:46 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:40
सूर्यास्त
17:14
चंद्रोदय
09:48
चंद्रास्त
21:06
दिनमान
10h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:53 – 05:46
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:18 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:57 – 13:16
यमगंड
07:59 – 09:19
गुलिक काल
10:38 – 11:57

24 दिसंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:40 – 07:59शुभ
अमृत07:59 – 09:19शुभ
काल09:19 – 10:38टालें
शुभ10:38 – 11:57शुभ
रोग11:57 – 13:16टालें
उद्वेग13:16 – 14:36टालें
चर14:36 – 15:55सामान्य
लाभ15:55 – 17:14शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:14 – 18:55टालें
शुभ18:55 – 20:36शुभ
अमृत20:36 – 22:17शुभ
चर22:17 – 23:57सामान्य
रोग23:57 – 01:38टालें
काल01:38 – 03:19टालें
लाभ03:19 – 05:00शुभ
उद्वेग05:00 – 06:41टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:4007:33दिन
चंद्र07:3308:26दिन
शनि08:2609:19दिन
गुरु09:1910:12दिन
मंगल10:1211:04दिन
सूर्य11:0411:57दिन
शुक्र11:5712:50दिन
बुध12:5013:43दिन
चंद्र13:4314:36दिन
शनि14:3615:28दिन
गुरु15:2816:21दिन
मंगल16:2117:14दिन
सूर्य17:1418:21रात
शुक्र18:2119:29रात
बुध19:2920:36रात
चंद्र20:3621:43रात
शनि21:4322:50रात
गुरु22:5023:57रात
मंगल23:5701:05रात
सूर्य01:0502:12रात
शुक्र02:1203:19रात
बुध03:1904:26रात
चंद्र04:2605:33रात
शनि05:3306:41रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
24 दिस॰ 2025विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
30 दिस॰ 2025शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
1 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 जन॰ 2026पौष पूर्णिमापूर्णिमा
7 जन॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 जन॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 जन॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 जन॰ 2026मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 जन॰ 2026माघ अमावस्याअमावस्या
22 जन॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां वाराणसी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2200° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।