14 मई 2026 को वाराणसी का पंचांग

गुरुवार, 14 मई 2026, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

गुरुवार, 14 मई 2026 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण द्वादशी (11:21 तक), नक्षत्र रेवती (22:34 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 05:13 पर और सूर्यास्त 18:35 पर है। राहुकाल 13:34 से 15:14 तक है।

दिन और रात
दिन 05:13 – 18:35
रात 05:13 तक
तिथि
द्वादशी, 11:21 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
रेवती, 22:34 तक
अश्विनी
चौघड़िया
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

14 मई 2026 का पंचांग

वारगुरुवार
तिथि
कृष्ण द्वादशी 11:21 तक
कृष्ण त्रयोदशी 08:31, 15 मई तक
नक्षत्र
रेवती 22:34 तक
अश्विनी 20:14, 15 मई तक
योग
प्रीति 17:53 तक
आयुष्मान 14:21, 15 मई तक
करण
तैतिल 11:21 तक
गर 22:00 तक
वणिज 08:31, 15 मई तक
चंद्र राशि
मीन 22:34 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:13
सूर्यास्त
18:35
चंद्रोदय
02:58
चंद्रास्त
15:59
दिनमान
13h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:48 – 04:31
अभिजीत मुहूर्त
11:27 – 12:21

अशुभ समय

राहुकाल
13:34 – 15:14
यमगंड
05:13 – 06:54
गुलिक काल
08:34 – 10:14

14 मई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
शुभ05:13 – 06:54शुभ
रोग06:54 – 08:34टालें
उद्वेग08:34 – 10:14टालें
चर10:14 – 11:54सामान्य
लाभ11:54 – 13:34शुभ
अमृत13:34 – 15:14शुभ
काल15:14 – 16:55टालें
शुभ16:55 – 18:35शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
अमृत18:35 – 19:55शुभ
चर19:55 – 21:14सामान्य
रोग21:14 – 22:34टालें
काल22:34 – 23:54टालें
लाभ23:54 – 01:14शुभ
उद्वेग01:14 – 02:33टालें
शुभ02:33 – 03:53शुभ
अमृत03:53 – 05:13शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
गुरु05:1306:20दिन
मंगल06:2007:27दिन
सूर्य07:2708:34दिन
शुक्र08:3409:41दिन
बुध09:4110:47दिन
चंद्र10:4711:54दिन
शनि11:5413:01दिन
गुरु13:0114:08दिन
मंगल14:0815:14दिन
सूर्य15:1416:21दिन
शुक्र16:2117:28दिन
बुध17:2818:35दिन
चंद्र18:3519:28रात
शनि19:2820:21रात
गुरु20:2121:14रात
मंगल21:1422:07रात
सूर्य22:0723:01रात
शुक्र23:0123:54रात
बुध23:5400:47रात
चंद्र00:4701:40रात
शनि01:4002:33रात
गुरु02:3303:27रात
मंगल03:2704:20रात
सूर्य04:2005:13रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
15 मई 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 मई 2026वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2026ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
20 मई 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 मई 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 मई 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 मई 2026अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
4 जून 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 जून 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 जून 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां वाराणसी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2254° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।