20 मई 2026 को वाराणसी का पंचांग

बुधवार, 20 मई 2026, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 20 मई 2026 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्थी (11:07 तक), नक्षत्र आर्द्रा (06:12 तक) और योग शूल है। सूर्योदय 05:11 पर और सूर्यास्त 18:38 पर है। राहुकाल 11:54 से 13:35 तक है।

दिन और रात
दिन 05:11 – 18:38
रात 05:10 तक
तिथि
चतुर्थी, 11:07 तक
पंचमी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 04:12 तक
पुष्य
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

20 मई 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल चतुर्थी 11:07 तक
शुक्ल पंचमी 08:27, 21 मई तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 04:12, 21 मई तक
पुष्य 02:49, 22 मई तक
योग
शूलअशुभ 14:10 तक
गंडअशुभ 10:58, 21 मई तक
करण
विष्टि (भद्रा) 11:07 तक
बव 21:42 तक
बालव 08:27, 21 मई तक
चंद्र राशि
मिथुन 22:39 तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:11
सूर्यास्त
18:38
चंद्रोदय
08:23
चंद्रास्त
22:40
दिनमान
13h 27m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
अधिक ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
अधिक ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:46 – 04:28
अभिजीत मुहूर्त
11:27 – 12:21 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:54 – 13:35
यमगंड
06:52 – 08:32
गुलिक काल
10:13 – 11:54

20 मई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:11 – 06:52शुभ
अमृत06:52 – 08:32शुभ
काल08:32 – 10:13टालें
शुभ10:13 – 11:54शुभ
रोग11:54 – 13:35टालें
उद्वेग13:35 – 15:16टालें
चर15:16 – 16:57सामान्य
लाभ16:57 – 18:38शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:38 – 19:57टालें
शुभ19:57 – 21:16शुभ
अमृत21:16 – 22:35शुभ
चर22:35 – 23:54सामान्य
रोग23:54 – 01:13टालें
काल01:13 – 02:32टालें
लाभ02:32 – 03:51शुभ
उद्वेग03:51 – 05:10टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:1106:18दिन
चंद्र06:1807:25दिन
शनि07:2508:32दिन
गुरु08:3209:40दिन
मंगल09:4010:47दिन
सूर्य10:4711:54दिन
शुक्र11:5413:02दिन
बुध13:0214:09दिन
चंद्र14:0915:16दिन
शनि15:1616:23दिन
गुरु16:2317:31दिन
मंगल17:3118:38दिन
सूर्य18:3819:31रात
शुक्र19:3120:23रात
बुध20:2321:16रात
चंद्र21:1622:09रात
शनि22:0923:01रात
गुरु23:0123:54रात
मंगल23:5400:47रात
सूर्य00:4701:39रात
शुक्र01:3902:32रात
बुध02:3203:25रात
चंद्र03:2504:18रात
शनि04:1805:10रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
20 मई 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
27 मई 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
29 मई 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
31 मई 2026अधिक ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
4 जून 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
8 जून 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
11 जून 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
13 जून 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
15 जून 2026अधिक ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
15 जून 2026मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
18 जून 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी

तिथियां वाराणसी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2256° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।