11 जुलाई 2026 को वाराणसी का पंचांग

शनिवार, 11 जुलाई 2026, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 11 जुलाई 2026 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (05:23 तक), नक्षत्र कृत्तिका (11:03 तक) और योग गंड है। सूर्योदय 05:15 पर और सूर्यास्त 18:51 पर है। राहुकाल 08:39 से 10:21 तक है।

दिन और रात
दिन 05:15 – 18:51
रात 05:15 तक
तिथि
द्वादशी, 02:04 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
कृत्तिका, 11:03 तक
रोहिणी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 जुलाई 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 05:23 तक
कृष्ण द्वादशी 02:04, 12 जुल॰ तक
कृष्ण त्रयोदशी 22:30, 12 जुल॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 08:29, 12 जुल॰ तक
योग
गंडअशुभ 00:05, 12 जुल॰ तक
वृद्धि 20:06, 12 जुल॰ तक
करण
बालव 05:23 तक
कौलव 15:46 तक
तैतिल 02:04, 12 जुल॰ तक
गर 12:18, 12 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमिथुन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:15
सूर्यास्त
18:51
चंद्रोदय
01:32
चंद्रास्त
15:52
दिनमान
13h 37m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
ज्येष्ठ
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:52 – 04:33
अभिजीत मुहूर्त
11:36 – 12:30

अशुभ समय

राहुकाल
08:39 – 10:21
यमगंड
13:45 – 15:27
गुलिक काल
05:15 – 06:57

11 जुलाई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:15 – 06:57टालें
शुभ06:57 – 08:39शुभ
रोग08:39 – 10:21टालें
उद्वेग10:21 – 12:03टालें
चर12:03 – 13:45सामान्य
लाभ13:45 – 15:27शुभ
अमृत15:27 – 17:09शुभ
काल17:09 – 18:51टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:51 – 20:09शुभ
उद्वेग20:09 – 21:27टालें
शुभ21:27 – 22:45शुभ
अमृत22:45 – 00:03शुभ
चर00:03 – 01:21सामान्य
रोग01:21 – 02:39टालें
काल02:39 – 03:57टालें
लाभ03:57 – 05:15शुभ

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:1506:23दिन
गुरु06:2307:31दिन
मंगल07:3108:39दिन
सूर्य08:3909:47दिन
शुक्र09:4710:55दिन
बुध10:5512:03दिन
चंद्र12:0313:11दिन
शनि13:1114:19दिन
गुरु14:1915:27दिन
मंगल15:2716:35दिन
सूर्य16:3517:43दिन
शुक्र17:4318:51दिन
बुध18:5119:43रात
चंद्र19:4320:35रात
शनि20:3521:27रात
गुरु21:2722:19रात
मंगल22:1923:11रात
सूर्य23:1100:03रात
शुक्र00:0300:55रात
बुध00:5501:47रात
चंद्र01:4702:39रात
शनि02:3903:31रात
गुरु03:3104:23रात
मंगल04:2305:15रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
11 जुल॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
12 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
14 जुल॰ 2026आषाढ़ अमावस्याअमावस्या
16 जुल॰ 2026कर्क संक्रांतिसूर्य का कर्क में प्रवेश
17 जुल॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 जुल॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 जुल॰ 2026आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
2 अग॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 अग॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 अग॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां वाराणसी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2276° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।