17 जुलाई 2026 को वाराणसी का पंचांग

शुक्रवार, 17 जुलाई 2026, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 17 जुलाई 2026 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (06:28 तक), नक्षत्र मघा (18:35 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 05:17 पर और सूर्यास्त 18:50 पर है। राहुकाल 10:22 से 12:04 तक है।

दिन और रात
दिन 05:17 – 18:50
रात 05:18 तक
तिथि
चतुर्थी, 04:43 तक
नक्षत्र
मघा, 18:35 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 जुलाई 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 06:28 तक
शुक्ल चतुर्थी 04:43, 18 जुल॰ तक
शुक्ल पंचमी 03:43, 19 जुल॰ तक
नक्षत्र
मघा 18:35 तक
पूर्वा फाल्गुनी 18:00, 18 जुल॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 22:46 तक
वरीयान 20:45, 18 जुल॰ तक
करण
गर 06:28 तक
वणिज 17:30 तक
विष्टि (भद्रा) 04:43, 18 जुल॰ तक
बव 16:07, 18 जुल॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकर्क
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:17
सूर्यास्त
18:50
चंद्रोदय
08:12
चंद्रास्त
21:11
दिनमान
13h 33m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आषाढ़
मास (पूर्णिमांत)
आषाढ़
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
ग्रीष्म
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:54 – 04:36
अभिजीत मुहूर्त
11:37 – 12:31

अशुभ समय

राहुकाल
10:22 – 12:04
यमगंड
15:27 – 17:08
गुलिक काल
06:59 – 08:41

17 जुलाई 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:17 – 06:59सामान्य
लाभ06:59 – 08:41शुभ
अमृत08:41 – 10:22शुभ
काल10:22 – 12:04टालें
शुभ12:04 – 13:45शुभ
रोग13:45 – 15:27टालें
उद्वेग15:27 – 17:08टालें
चर17:08 – 18:50सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:50 – 20:08टालें
काल20:08 – 21:27टालें
लाभ21:27 – 22:45शुभ
उद्वेग22:45 – 00:04टालें
शुभ00:04 – 01:22शुभ
अमृत01:22 – 02:41शुभ
चर02:41 – 03:59सामान्य
रोग03:59 – 05:18टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:1706:25दिन
बुध06:2507:33दिन
चंद्र07:3308:41दिन
शनि08:4109:48दिन
गुरु09:4810:56दिन
मंगल10:5612:04दिन
सूर्य12:0413:11दिन
शुक्र13:1114:19दिन
बुध14:1915:27दिन
चंद्र15:2716:35दिन
शनि16:3517:42दिन
गुरु17:4218:50दिन
मंगल18:5019:42रात
सूर्य19:4220:35रात
शुक्र20:3521:27रात
बुध21:2722:19रात
चंद्र22:1923:12रात
शनि23:1200:04रात
गुरु00:0400:56रात
मंगल00:5601:49रात
सूर्य01:4902:41रात
शुक्र02:4103:33रात
बुध03:3304:26रात
चंद्र04:2605:18रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
17 जुल॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
25 जुल॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
27 जुल॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
29 जुल॰ 2026आषाढ़ पूर्णिमापूर्णिमा
2 अग॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
6 अग॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
9 अग॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
10 अग॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 अग॰ 2026श्रावण अमावस्याअमावस्या

तिथियां वाराणसी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2278° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।