7 मई 2027 को वाराणसी का पंचांग

शुक्रवार, 7 मई 2027, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 7 मई 2027 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल प्रतिपदा (14:14 तक), नक्षत्र कृत्तिका (23:42 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 05:18 पर और सूर्यास्त 18:31 पर है। राहुकाल 10:15 से 11:54 तक है।

दिन और रात
दिन 05:18 – 18:31
रात 05:17 तक
तिथि
प्रतिपदा, 14:14 तक
द्वितीया
नक्षत्र
कृत्तिका, 23:42 तक
रोहिणी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

7 मई 2027 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल प्रतिपदा 14:14 तक
शुक्ल द्वितीया 11:43, 8 मई तक
नक्षत्र
रोहिणी 21:53, 8 मई तक
योग
सौभाग्य 08:57 तक
शोभन 05:51, 8 मई तक
करण
बव 14:14 तक
बालव 01:00, 8 मई तक
कौलव 11:43, 8 मई तक
चंद्र राशि
मेष 06:56 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:18
सूर्यास्त
18:31
चंद्रोदय
05:31
चंद्रास्त
19:42
दिनमान
13h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:51 – 04:35
अभिजीत मुहूर्त
11:28 – 12:21

अशुभ समय

राहुकाल
10:15 – 11:54
यमगंड
15:13 – 16:52
गुलिक काल
06:57 – 08:36

7 मई 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:18 – 06:57सामान्य
लाभ06:57 – 08:36शुभ
अमृत08:36 – 10:15शुभ
काल10:15 – 11:54टालें
शुभ11:54 – 13:34शुभ
रोग13:34 – 15:13टालें
उद्वेग15:13 – 16:52टालें
चर16:52 – 18:31सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:31 – 19:52टालें
काल19:52 – 21:13टालें
लाभ21:13 – 22:33शुभ
उद्वेग22:33 – 23:54टालें
शुभ23:54 – 01:15शुभ
अमृत01:15 – 02:36शुभ
चर02:36 – 03:56सामान्य
रोग03:56 – 05:17टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:1806:24दिन
बुध06:2407:30दिन
चंद्र07:3008:36दिन
शनि08:3609:42दिन
गुरु09:4210:48दिन
मंगल10:4811:54दिन
सूर्य11:5413:00दिन
शुक्र13:0014:07दिन
बुध14:0715:13दिन
चंद्र15:1316:19दिन
शनि16:1917:25दिन
गुरु17:2518:31दिन
मंगल18:3119:25रात
सूर्य19:2520:19रात
शुक्र20:1921:13रात
बुध21:1322:06रात
चंद्र22:0623:00रात
शनि23:0023:54रात
गुरु23:5400:48रात
मंगल00:4801:42रात
सूर्य01:4202:36रात
शुक्र02:3603:29रात
बुध03:2904:23रात
चंद्र04:2305:17रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
10 मई 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
15 मई 2027वृषभ संक्रांतिसूर्य का वृषभ में प्रवेश
16 मई 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
18 मई 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 मई 2027वैशाख पूर्णिमापूर्णिमा
24 मई 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
29 मई 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
1 जून 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
3 जून 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
4 जून 2027ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या

तिथियां वाराणसी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2390° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।