31 अगस्त 2027 को वाराणसी का पंचांग

मंगलवार, 31 अगस्त 2027, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 31 अगस्त 2027 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (23:11 तक), नक्षत्र मघा (22:20 तक) और योग शिव है। सूर्योदय 05:38 पर और सूर्यास्त 18:18 पर है। राहुकाल 15:08 से 16:43 तक है।

दिन और रात
दिन 05:38 – 18:18
रात 05:38 तक
तिथि
अमावस्या, 23:11 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
मघा, 22:20 तक
पूर्वा फाल्गुनी
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 अगस्त 2027 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
अमावस्या 23:11 तक
शुक्ल प्रतिपदा 19:50, 1 सित॰ तक
नक्षत्र
मघा 22:20 तक
पूर्वा फाल्गुनी 19:48, 1 सित॰ तक
योग
शिव 21:36 तक
सिद्ध 17:45, 1 सित॰ तक
करण
चतुष्पद 12:55 तक
नाग 23:11 तक
किंस्तुघ्न 09:29, 1 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:38
सूर्यास्त
18:18
चंद्रोदय
04:55
चंद्रास्त
17:57
दिनमान
12h 40m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:07 – 04:52
अभिजीत मुहूर्त
11:33 – 12:23

अशुभ समय

राहुकाल
15:08 – 16:43
यमगंड
08:48 – 10:23
गुलिक काल
11:58 – 13:33

31 अगस्त 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:38 – 07:13टालें
उद्वेग07:13 – 08:48टालें
चर08:48 – 10:23सामान्य
लाभ10:23 – 11:58शुभ
अमृत11:58 – 13:33शुभ
काल13:33 – 15:08टालें
शुभ15:08 – 16:43शुभ
रोग16:43 – 18:18टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:18 – 19:43टालें
लाभ19:43 – 21:08शुभ
उद्वेग21:08 – 22:33टालें
शुभ22:33 – 23:58शुभ
अमृत23:58 – 01:23शुभ
चर01:23 – 02:48सामान्य
रोग02:48 – 04:13टालें
काल04:13 – 05:38टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:3806:41दिन
सूर्य06:4107:44दिन
शुक्र07:4408:48दिन
बुध08:4809:51दिन
चंद्र09:5110:55दिन
शनि10:5511:58दिन
गुरु11:5813:01दिन
मंगल13:0114:05दिन
सूर्य14:0515:08दिन
शुक्र15:0816:11दिन
बुध16:1117:15दिन
चंद्र17:1518:18दिन
शनि18:1819:15रात
गुरु19:1520:11रात
मंगल20:1121:08रात
सूर्य21:0822:05रात
शुक्र22:0523:01रात
बुध23:0123:58रात
चंद्र23:5800:55रात
शनि00:5501:51रात
गुरु01:5102:48रात
मंगल02:4803:45रात
सूर्य03:4504:41रात
शुक्र04:4105:38रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
31 अग॰ 2027भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
4 सित॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
11 सित॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
13 सित॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
15 सित॰ 2027भाद्रपद पूर्णिमापूर्णिमा
17 सित॰ 2027कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
20 सित॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
23 सित॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
26 सित॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
28 सित॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी

तिथियां वाराणसी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2435° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।