4 जून 2029 को वाराणसी का पंचांग

सोमवार, 4 जून 2029, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 4 जून 2029 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (19:46 तक), नक्षत्र शतभिषा (07:53 तक) और योग विष्कंभ है। सूर्योदय 05:07 पर और सूर्यास्त 18:45 पर है। राहुकाल 06:49 से 08:31 तक है।

दिन और रात
दिन 05:07 – 18:45
रात 05:07 तक
तिथि
अष्टमी, 19:46 तक
नवमी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 जून 2029 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 19:46 तक
कृष्ण नवमी 21:58, 5 जून तक
नक्षत्र
शतभिषा 07:53 तक
योग
विष्कंभअशुभ 14:56 तक
प्रीति 15:41, 5 जून तक
करण
बालव 06:48 तक
कौलव 19:46 तक
तैतिल 08:50, 5 जून तक
चंद्र राशि
कुंभ 03:49, 5 जून तक
सूर्य राशिवृषभ
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:07
सूर्यास्त
18:45
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
12:06
दिनमान
13h 38m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
वैशाख
मास (पूर्णिमांत)
ज्येष्ठ
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:44 – 04:25
अभिजीत मुहूर्त
11:29 – 12:23

अशुभ समय

राहुकाल
06:49 – 08:31
यमगंड
10:14 – 11:56
गुलिक काल
13:38 – 15:21

4 जून 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत05:07 – 06:49शुभ
काल06:49 – 08:31टालें
शुभ08:31 – 10:14शुभ
रोग10:14 – 11:56टालें
उद्वेग11:56 – 13:38टालें
चर13:38 – 15:21सामान्य
लाभ15:21 – 17:03शुभ
अमृत17:03 – 18:45शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:45 – 20:03सामान्य
रोग20:03 – 21:21टालें
काल21:21 – 22:38टालें
लाभ22:38 – 23:56शुभ
उद्वेग23:56 – 01:14टालें
शुभ01:14 – 02:31शुभ
अमृत02:31 – 03:49शुभ
चर03:49 – 05:07सामान्य

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र05:0706:15दिन
शनि06:1507:23दिन
गुरु07:2308:31दिन
मंगल08:3109:40दिन
सूर्य09:4010:48दिन
शुक्र10:4811:56दिन
बुध11:5613:04दिन
चंद्र13:0414:12दिन
शनि14:1215:21दिन
गुरु15:2116:29दिन
मंगल16:2917:37दिन
सूर्य17:3718:45दिन
शुक्र18:4519:37रात
बुध19:3720:29रात
चंद्र20:2921:21रात
शनि21:2122:12रात
गुरु22:1223:04रात
मंगल23:0423:56रात
सूर्य23:5600:48रात
शुक्र00:4801:40रात
बुध01:4002:31रात
चंद्र02:3103:23रात
शनि03:2304:15रात
गुरु04:1505:07रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
4 जून 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
7 जून 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
9 जून 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
12 जून 2029ज्येष्ठ अमावस्याअमावस्या
15 जून 2029मिथुन संक्रांतिसूर्य का मिथुन में प्रवेश
16 जून 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
22 जून 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
24 जून 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
26 जून 2029ज्येष्ठ पूर्णिमापूर्णिमा
30 जून 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी

तिथियां वाराणसी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2681° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।