21 अगस्त 2029 को वाराणसी का पंचांग

मंगलवार, 21 अगस्त 2029, वाराणसी, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 21 अगस्त 2029 को वाराणसी में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (06:53 तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (04:51, 22 अग॰ तक) और योग आयुष्मान है। सूर्योदय 05:34 पर और सूर्यास्त 18:27 पर है। राहुकाल 15:14 से 16:51 तक है।

दिन और रात
दिन 05:34 – 18:27
रात 05:34 तक
तिथि
त्रयोदशी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 04:51 तक
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

21 अगस्त 2029 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 06:53 तक
शुक्ल त्रयोदशी 06:39, 22 अग॰ तक
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा 04:51, 22 अग॰ तक
श्रवण 05:39, 23 अग॰ तक
योग
आयुष्मान 20:27 तक
सौभाग्य 19:24, 22 अग॰ तक
करण
बालव 06:53 तक
कौलव 18:43 तक
तैतिल 06:39, 22 अग॰ तक
चंद्र राशि
धनु 10:30 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:34
सूर्यास्त
18:27
चंद्रोदय
16:31
चंद्रास्त
02:44
दिनमान
12h 54m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
श्रावण
मास (पूर्णिमांत)
श्रावण
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:05 – 04:49
अभिजीत मुहूर्त
11:35 – 12:26

अशुभ समय

राहुकाल
15:14 – 16:51
यमगंड
08:47 – 10:24
गुलिक काल
12:01 – 13:37

21 अगस्त 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग05:34 – 07:10टालें
उद्वेग07:10 – 08:47टालें
चर08:47 – 10:24सामान्य
लाभ10:24 – 12:01शुभ
अमृत12:01 – 13:37शुभ
काल13:37 – 15:14टालें
शुभ15:14 – 16:51शुभ
रोग16:51 – 18:27टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:27 – 19:51टालें
लाभ19:51 – 21:14शुभ
उद्वेग21:14 – 22:37टालें
शुभ22:37 – 00:01शुभ
अमृत00:01 – 01:24शुभ
चर01:24 – 02:47सामान्य
रोग02:47 – 04:11टालें
काल04:11 – 05:34टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल05:3406:38दिन
सूर्य06:3807:43दिन
शुक्र07:4308:47दिन
बुध08:4709:52दिन
चंद्र09:5210:56दिन
शनि10:5612:01दिन
गुरु12:0113:05दिन
मंगल13:0514:09दिन
सूर्य14:0915:14दिन
शुक्र15:1416:18दिन
बुध16:1817:23दिन
चंद्र17:2318:27दिन
शनि18:2719:23रात
गुरु19:2320:18रात
मंगल20:1821:14रात
सूर्य21:1422:10रात
शुक्र22:1023:05रात
बुध23:0500:01रात
चंद्र00:0100:56रात
शनि00:5601:52रात
गुरु01:5202:47रात
मंगल02:4703:43रात
सूर्य03:4304:39रात
शुक्र04:3905:34रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
22 अग॰ 2029प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
24 अग॰ 2029श्रावण पूर्णिमापूर्णिमा
28 अग॰ 2029संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
1 सित॰ 2029कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
4 सित॰ 2029कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
6 सित॰ 2029प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
8 सित॰ 2029भाद्रपद अमावस्याअमावस्या
11 सित॰ 2029विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
17 सित॰ 2029कन्या संक्रांतिसूर्य का कन्या में प्रवेश
18 सित॰ 2029शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां वाराणसी में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2711° (लाहिड़ी)। समय वाराणसी (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।