31 दिसंबर 2025 को वृंदावन का पंचांग

बुधवार, 31 दिसंबर 2025, वृंदावन, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 31 दिसंबर 2025 को वृंदावन में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वादशी (01:48, 1 जन॰ तक), नक्षत्र कृत्तिका (01:30, 1 जन॰ तक) और योग साध्य है। सूर्योदय 07:09 पर और सूर्यास्त 17:35 पर है। राहुकाल 12:22 से 13:40 तक है।

दिन और रात
दिन 07:09 – 17:35
रात 07:09 तक
तिथि
द्वादशी, 01:48 तक
त्रयोदशी
नक्षत्र
कृत्तिका, 01:30 तक
रोहिणी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

31 दिसंबर 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल द्वादशी 01:48, 1 जन॰ तक
शुक्ल त्रयोदशी 22:22, 1 जन॰ तक
नक्षत्र
कृत्तिका 01:30, 1 जन॰ तक
रोहिणी 22:48, 1 जन॰ तक
योग
साध्य 21:13 तक
शुभ 17:12, 1 जन॰ तक
करण
बव 15:26 तक
बालव 01:48, 1 जन॰ तक
कौलव 12:06, 1 जन॰ तक
चंद्र राशि
मेष 09:23 तक
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:09
सूर्यास्त
17:35
चंद्रोदय
14:20
चंद्रास्त
03:37
दिनमान
10h 26m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:20 – 06:15
अभिजीत मुहूर्त
12:01 – 12:43 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:22 – 13:40
यमगंड
08:27 – 09:45
गुलिक काल
11:04 – 12:22

31 दिसंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:09 – 08:27शुभ
अमृत08:27 – 09:45शुभ
काल09:45 – 11:04टालें
शुभ11:04 – 12:22शुभ
रोग12:22 – 13:40टालें
उद्वेग13:40 – 14:58टालें
चर14:58 – 16:16सामान्य
लाभ16:16 – 17:35शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:35 – 19:16टालें
शुभ19:16 – 20:58शुभ
अमृत20:58 – 22:40शुभ
चर22:40 – 00:22सामान्य
रोग00:22 – 02:04टालें
काल02:04 – 03:46टालें
लाभ03:46 – 05:27शुभ
उद्वेग05:27 – 07:09टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:0908:01दिन
चंद्र08:0108:53दिन
शनि08:5309:45दिन
गुरु09:4510:37दिन
मंगल10:3711:30दिन
सूर्य11:3012:22दिन
शुक्र12:2213:14दिन
बुध13:1414:06दिन
चंद्र14:0614:58दिन
शनि14:5815:50दिन
गुरु15:5016:42दिन
मंगल16:4217:35दिन
सूर्य17:3518:42रात
शुक्र18:4219:50रात
बुध19:5020:58रात
चंद्र20:5822:06रात
शनि22:0623:14रात
गुरु23:1400:22रात
मंगल00:2201:30रात
सूर्य01:3002:38रात
शुक्र02:3803:46रात
बुध03:4604:53रात
चंद्र04:5306:01रात
शनि06:0107:09रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
1 जन॰ 2026प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
3 जन॰ 2026पौष पूर्णिमापूर्णिमा
6 जन॰ 2026संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
11 जन॰ 2026कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
14 जन॰ 2026कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
14 जन॰ 2026मकर संक्रांतिसूर्य का मकर में प्रवेश
16 जन॰ 2026प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
18 जन॰ 2026माघ अमावस्याअमावस्या
22 जन॰ 2026विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
29 जन॰ 2026शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी

तिथियां वृंदावन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2202° (लाहिड़ी)। समय वृंदावन (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

किसी अन्य शहर का पंचांग

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।