2 फ़रवरी 2027 को वृंदावन का पंचांग

मंगलवार, 2 फ़रवरी 2027, वृंदावन, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 2 फ़रवरी 2027 को वृंदावन में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण एकादशी (11:10 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (09:21 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 07:05 पर और सूर्यास्त 18:00 पर है। राहुकाल 15:16 से 16:38 तक है।

दिन और रात
दिन 07:05 – 18:00
रात 07:04 तक
तिथि
एकादशी, 11:10 तक
द्वादशी
नक्षत्र
मूल
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 फ़रवरी 2027 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण एकादशी 11:10 तक
कृष्ण द्वादशी 13:50, 3 फ़र॰ तक
नक्षत्र
मूल 12:26, 3 फ़र॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 17:47 तक
हर्षण 18:44, 3 फ़र॰ तक
करण
बालव 11:10 तक
कौलव 00:30, 3 फ़र॰ तक
तैतिल 13:50, 3 फ़र॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:05
सूर्यास्त
18:00
चंद्रोदय
03:57
चंद्रास्त
14:10
दिनमान
10h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:20 – 06:13
अभिजीत मुहूर्त
12:11 – 12:54

अशुभ समय

राहुकाल
15:16 – 16:38
यमगंड
09:49 – 11:11
गुलिक काल
12:32 – 13:54

2 फ़रवरी 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग07:05 – 08:27टालें
उद्वेग08:27 – 09:49टालें
चर09:49 – 11:11सामान्य
लाभ11:11 – 12:32शुभ
अमृत12:32 – 13:54शुभ
काल13:54 – 15:16टालें
शुभ15:16 – 16:38शुभ
रोग16:38 – 18:00टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल18:00 – 19:38टालें
लाभ19:38 – 21:16शुभ
उद्वेग21:16 – 22:54टालें
शुभ22:54 – 00:32शुभ
अमृत00:32 – 02:10शुभ
चर02:10 – 03:48सामान्य
रोग03:48 – 05:26टालें
काल05:26 – 07:04टालें

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल07:0507:59दिन
सूर्य07:5908:54दिन
शुक्र08:5409:49दिन
बुध09:4910:43दिन
चंद्र10:4311:38दिन
शनि11:3812:32दिन
गुरु12:3213:27दिन
मंगल13:2714:22दिन
सूर्य14:2215:16दिन
शुक्र15:1616:11दिन
बुध16:1117:05दिन
चंद्र17:0518:00दिन
शनि18:0019:05रात
गुरु19:0520:11रात
मंगल20:1121:16रात
सूर्य21:1622:21रात
शुक्र22:2123:27रात
बुध23:2700:32रात
चंद्र00:3201:38रात
शनि01:3802:43रात
गुरु02:4303:48रात
मंगल03:4804:54रात
सूर्य04:5405:59रात
शुक्र05:5907:04रात

आने वाले व्रत और तिथियां

तारीखव्रत/पर्वतिथि / घटना
2 फ़र॰ 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी
4 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतकृष्ण त्रयोदशी
6 फ़र॰ 2027माघ अमावस्याअमावस्या
10 फ़र॰ 2027विनायक चतुर्थीशुक्ल चतुर्थी
13 फ़र॰ 2027कुंभ संक्रांतिसूर्य का कुंभ में प्रवेश
17 फ़र॰ 2027शुक्ल एकादशीशुक्ल एकादशी
19 फ़र॰ 2027प्रदोष व्रतशुक्ल त्रयोदशी
20 फ़र॰ 2027माघ पूर्णिमापूर्णिमा
24 फ़र॰ 2027संकष्टी चतुर्थीकृष्ण चतुर्थी
28 फ़र॰ 2027कालाष्टमीकृष्ण अष्टमी
3 मार्च 2027कृष्ण एकादशीकृष्ण एकादशी

तिथियां वृंदावन में स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि के अनुसार हैं। कुछ त्योहार अन्य नियमों से मनाए जाते हैं (जैसे चंद्रोदय या प्रदोष काल पर), इसलिए स्थानीय परंपरा में एक दिन का अंतर हो सकता है। सभी व्रत तिथियां →

अयनांश 24.2355° (लाहिड़ी)। समय वृंदावन (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

अगले 30 दिनों के त्योहार

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पंचांग क्या है?

पंचांग हिंदू कैलेंडर है। इसके पाँच अंग हैं: तिथि (चंद्र दिवस), वार (सप्ताह का दिन), नक्षत्र, योग और करण। सूर्योदय, राहु काल और मुहूर्त के समय के साथ मिलकर इनका उपयोग शुभ समय चुनने के लिए किया जाता है।

पंचांग हर शहर में अलग क्यों होता है?

सूर्योदय, सूर्यास्त, राहु काल, चौघड़िया और सूर्योदय के समय की तिथि, सब आपके स्थान पर निर्भर करते हैं। तिथि और नक्षत्र के समाप्त होने का क्षण हर जगह एक ही होता है, पर इसे आपके स्थानीय समय में दिखाया जाता है।

दिन के लिए कौन-सी तिथि मानी जाती है?

परंपरागत रूप से स्थानीय सूर्योदय के समय की तिथि (उदया तिथि) ज़्यादातर व्रत-त्योहारों के लिए पूरे दिन मान्य होती है। अगर कोई तिथि दो सूर्योदयों के बीच ही शुरू होकर समाप्त हो जाए, तो उसे क्षय तिथि कहते हैं।

राहु काल की गणना कैसे होती है?

सूर्योदय से सूर्यास्त तक के समय को आठ बराबर भागों में बाँटा जाता है। राहु काल रविवार को 8वाँ, सोमवार को 2रा, मंगलवार को 7वाँ, बुधवार को 5वाँ, गुरुवार को 6ठा, शुक्रवार को 4था और शनिवार को 3रा भाग होता है।

यह पंचांग कौन-सा अयनांश इस्तेमाल करता है?

लाहिड़ी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय कैलेंडर और उत्तर भारत के अधिकांश पंचांगों का मानक है। सूर्योदय वह क्षण माना जाता है जब सूर्य का ऊपरी किनारा क्षितिज पर दिखाई देता है, सामान्य वायुमंडलीय अपवर्तन के साथ।