केतु किसका कारक है
- आध्यात्मिकता और मोक्ष
- अंतर्ज्ञान
- वैराग्य
- शोध और गूढ़ विद्याएँ
जब केतु बलवान हो
शुभ स्थिति में केतु अंतर्दृष्टि, आध्यात्मिक गहराई और सूक्ष्म विषयों पर पकड़ देता है।
जब केतु कमज़ोर हो
पीड़ित केतु भ्रम, अकेलापन और अचानक हानि ला सकता है।
हर भाव में केतु
प्रथम भाव में केतुद्वितीय भाव में केतुतृतीय भाव में केतुचतुर्थ भाव में केतुपंचम भाव में केतुषष्ठ भाव में केतुसप्तम भाव में केतुअष्टम भाव में केतुनवम भाव में केतुदशम भाव में केतुएकादश भाव में केतुद्वादश भाव में केतु
रत्न केवल तभी पहनें जब कोई ज्योतिषी आपकी पूरी कुंडली देख ले — कठिन भावों के स्वामी ग्रह का रत्न नुकसान कर सकता है।