ईरोडसाठी 7 ऑक्टोबर, 2027 रोजीचे पंचांग
गुरुवार, 7 ऑक्टोबर, 2027, ईरोड, भारत. वेळा Asia/Kolkata मध्ये आहेत.
गुरुवार, 7 ऑक्टोबर, 2027 रोजी ईरोड येथे सूर्योदयाच्या वेळी तिथी शुक्ल अष्टमी (06:28, 8 ऑक्टोपर्यंत), नक्षत्र पूर्वाषाढा (07:14, 8 ऑक्टोपर्यंत) आणि योग शोभन आहे. सूर्योदय 06:08 वाजता आणि सूर्यास्त 18:05 वाजता आहे. राहू काळ 13:36 ते 15:06पर्यंत आहे.
7 ऑक्टोबर, 2027 रोजीचे पंचांग
| वार | गुरुवार |
|---|---|
| तिथी | शुक्ल अष्टमी 06:28, 8 ऑक्टोपर्यंत |
| नक्षत्र | पूर्वाषाढा 07:14, 8 ऑक्टोपर्यंत |
| योग | शोभन 12:03पर्यंत अतिगंडअशुभ 12:52, 8 ऑक्टोपर्यंत |
| करण | विष्टी (भद्रा) 17:17पर्यंत बव 06:28, 8 ऑक्टोपर्यंत |
| चंद्ररास | |
| सूर्यरास | कन्या |
| पक्ष | शुक्ल पक्ष |
सूर्य आणि चंद्र
- सूर्योदय
- 06:08
- सूर्यास्त
- 18:05
- चंद्रोदय
- 12:29
- चंद्रास्त
- या दिवशी चंद्रास्त नाही
- दिनमान
- 11h 58m
हिंदू पंचांग
- महिना (अमांत)
- आश्विन
- महिना (पौर्णिमांत)
- आश्विन
- विक्रम संवत
- 2084
- शके
- 1949, प्लवंग संवत्सर
- ऋतू
- शरद ऋतू
- अयन
- दक्षिणायन
शुभ वेळा
- ब्राह्म मुहूर्त
- 04:31 – 05:19
- अभिजित मुहूर्त
- 11:43 – 12:30
अशुभ वेळा
- राहू काळ
- 13:36 – 15:06
- यमगंड
- 06:08 – 07:37
- गुलिक काळ
- 09:07 – 10:37
7 ऑक्टोबर, 2027 रोजीचे चौघडिया
चौघडिया दिवसाचे (सूर्योदय ते सूर्यास्त) आणि रात्रीचे (सूर्यास्त ते पुढील सूर्योदय) प्रत्येकी आठ भाग करते. अमृत, शुभ आणि लाभ कामाच्या सुरुवातीसाठी चांगले; चल प्रवासासाठी चांगले; उद्वेग, काळ आणि रोग नव्या सुरुवातीसाठी टाळणे उत्तम.
| दिवसाचे चौघडिया | वेळ | स्वरूप |
|---|---|---|
| शुभ | 06:08 – 07:37 | शुभ |
| रोग | 07:37 – 09:07 | टाळा |
| उद्वेग | 09:07 – 10:37 | टाळा |
| चर | 10:37 – 12:06 | सामान्य |
| लाभ | 12:06 – 13:36 | शुभ |
| अमृत | 13:36 – 15:06 | शुभ |
| काळ | 15:06 – 16:36 | टाळा |
| शुभ | 16:36 – 18:05 | शुभ |
| रात्रीचे चौघडिया | वेळ | स्वरूप |
|---|---|---|
| अमृत | 18:05 – 19:36 | शुभ |
| चर | 19:36 – 21:06 | सामान्य |
| रोग | 21:06 – 22:36 | टाळा |
| काळ | 22:36 – 00:06 | टाळा |
| लाभ | 00:06 – 01:37 | शुभ |
| उद्वेग | 01:37 – 03:07 | टाळा |
| शुभ | 03:07 – 04:37 | शुभ |
| अमृत | 04:37 – 06:08 | शुभ |
होरा (ग्रहांचे तास)
प्रत्येक होरा दिवसाचा किंवा रात्रीचा बारावा भाग असतो आणि त्यावर एका ग्रहाचे आधिपत्य असते; सूर्योदयाला वारस्वामीपासून सुरुवात होते. ग्रह ज्या गोष्टींचा कारक आहे त्या कामांसाठी त्याचा होरा वापरा — शिक्षणासाठी गुरू, कलांसाठी शुक्र, व्यापारासाठी बुध.
| होरा स्वामी | पासून | पर्यंत | दिवस / रात्र |
|---|---|---|---|
| गुरू | 06:08 | 07:07 | दिवस |
| मंगळ | 07:07 | 08:07 | दिवस |
| सूर्य | 08:07 | 09:07 | दिवस |
| शुक्र | 09:07 | 10:07 | दिवस |
| बुध | 10:07 | 11:07 | दिवस |
| चंद्र | 11:07 | 12:06 | दिवस |
| शनी | 12:06 | 13:06 | दिवस |
| गुरू | 13:06 | 14:06 | दिवस |
| मंगळ | 14:06 | 15:06 | दिवस |
| सूर्य | 15:06 | 16:06 | दिवस |
| शुक्र | 16:06 | 17:06 | दिवस |
| बुध | 17:06 | 18:05 | दिवस |
| चंद्र | 18:05 | 19:06 | रात्र |
| शनी | 19:06 | 20:06 | रात्र |
| गुरू | 20:06 | 21:06 | रात्र |
| मंगळ | 21:06 | 22:06 | रात्र |
| सूर्य | 22:06 | 23:06 | रात्र |
| शुक्र | 23:06 | 00:06 | रात्र |
| बुध | 00:06 | 01:07 | रात्र |
| चंद्र | 01:07 | 02:07 | रात्र |
| शनी | 02:07 | 03:07 | रात्र |
| गुरू | 03:07 | 04:07 | रात्र |
| मंगळ | 04:07 | 05:07 | रात्र |
| सूर्य | 05:07 | 06:08 | रात्र |
आगामी व्रते आणि तिथी
| तारीख | व्रत / सण | तिथी / घटना |
|---|---|---|
| 11 ऑक्टो, 2027 | शुक्ल एकादशी | शुक्ल एकादशी |
| 13 ऑक्टो, 2027 | प्रदोष व्रत | शुक्ल त्रयोदशी |
| 15 ऑक्टो, 2027 | आश्विन पौर्णिमा | पौर्णिमा |
| 18 ऑक्टो, 2027 | तूळ संक्रांती | सूर्याचा तूळ राशीत प्रवेश |
| 19 ऑक्टो, 2027 | संकष्ट चतुर्थी | कृष्ण चतुर्थी |
| 23 ऑक्टो, 2027 | कालाष्टमी | कृष्ण अष्टमी |
| 25 ऑक्टो, 2027 | कृष्ण एकादशी | कृष्ण एकादशी |
| 27 ऑक्टो, 2027 | प्रदोष व्रत | कृष्ण त्रयोदशी |
| 29 ऑक्टो, 2027 | कार्तिक अमावास्या | अमावास्या |
| 2 नोव्हें, 2027 | विनायक चतुर्थी | शुक्ल चतुर्थी |
तारखा ईरोड येथील स्थानिक सूर्योदयाच्या तिथीनुसार आहेत. काही सण इतर नियमांनुसार पाळले जातात (उदा. चंद्रोदय किंवा प्रदोषकाळी), त्यामुळे स्थानिक प्रथेनुसार एका दिवसाचा फरक पडू शकतो. सर्व व्रतांच्या तारखा →
अयनांश 24.2449° (लाहिरी). वेळा ईरोडच्या स्थानिक आहेत (Asia/Kolkata).
पुढील 30 दिवसांतील सण
दुसऱ्या शहराचे पंचांग
वारंवार विचारले जाणारे प्रश्न
पंचांग म्हणजे काय?
पंचांग हे हिंदू दिनदर्शिका-ग्रंथ आहे. त्याची पाच अंगे (पंच अंग) म्हणजे तिथी (चांद्र दिवस), वार, नक्षत्र, योग आणि करण. सूर्योदय, राहू काळ आणि मुहूर्तांच्या वेळांसह यांचा उपयोग शुभ वेळ निवडण्यासाठी केला जातो.
पंचांग शहरानुसार का बदलते?
सूर्योदय, सूर्यास्त, राहू काळ, चौघडिया आणि सूर्योदयाला असलेली तिथी हे सर्व तुमच्या ठिकाणावर अवलंबून असतात. तिथी आणि नक्षत्र संपण्याचा क्षण सर्वत्र एकच असतो, पण तो तुमच्या स्थानिक वेळेत दाखवला जातो.
दिवसासाठी कोणती तिथी मानली जाते?
परंपरेने बहुतेक व्रत-वैकल्यांसाठी स्थानिक सूर्योदयाला असलेली तिथी (उदय तिथी) संपूर्ण दिवसासाठी मानली जाते. एखादी तिथी दोन सूर्योदयांच्या दरम्यान सुरू होऊन संपल्यास तिला क्षय तिथी म्हणतात.
राहू काळ कसा मोजला जातो?
सूर्योदय ते सूर्यास्त या वेळेचे आठ समान भाग केले जातात. राहू काळ रविवारी 8वा, सोमवारी 2रा, मंगळवारी 7वा, बुधवारी 5वा, गुरुवारी 6वा, शुक्रवारी 4था आणि शनिवारी 3रा भाग असतो.
हे पंचांग कोणता अयनांश वापरते?
लाहिरी (चित्रपक्ष) अयनांश, जो भारतीय राष्ट्रीय पंचांग आणि बहुतेक उत्तर भारतीय पंचांगांचे मानक आहे. सूर्याची वरची कड क्षितिजावर दिसते तो क्षण सूर्योदय मानला जातो, ज्यात प्रमाणित वातावरणीय अपवर्तन विचारात घेतले जाते.