17 मार्च 2027 को अयोध्या का चौघड़िया

बुधवार, 17 मार्च 2027, अयोध्या, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 17 मार्च 2027 को अयोध्या में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल नवमी (06:44 तक), नक्षत्र आर्द्रा (06:45 तक) और योग सौभाग्य है। सूर्योदय 06:09 पर और सूर्यास्त 18:10 पर है। राहुकाल 12:09 से 13:40 तक है।

दिन और रात
दिन 06:09 – 18:10
रात 06:07 तक
तिथि
दशमी, 04:21 तक
एकादशी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 05:07 तक
पुष्य
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 मार्च 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:09 – 07:39शुभ
अमृत07:39 – 09:09शुभ
काल09:09 – 10:39टालें
शुभ10:39 – 12:09शुभ
रोग12:09 – 13:40टालें
उद्वेग13:40 – 15:10टालें
चर15:10 – 16:40सामान्य
लाभ16:40 – 18:10शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:10 – 19:40टालें
शुभ19:40 – 21:10शुभ
अमृत21:10 – 22:39शुभ
चर22:39 – 00:09सामान्य
रोग00:09 – 01:38टालें
काल01:38 – 03:08टालें
लाभ03:08 – 04:38शुभ
उद्वेग04:38 – 06:07टालें

17 मार्च 2027 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल नवमी 06:44 तक
शुक्ल दशमी 04:21, 18 मार्च तक
शुक्ल एकादशी 01:51, 19 मार्च तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 05:07, 18 मार्च तक
पुष्य 03:21, 19 मार्च तक
योग
सौभाग्य 08:53 तक
शोभन 05:47, 18 मार्च तक
अतिगंडअशुभ 02:34, 19 मार्च तक
करण
कौलव 06:44 तक
तैतिल 17:34 तक
गर 04:21, 18 मार्च तक
वणिज 15:07, 18 मार्च तक
चंद्र राशि
मिथुन 23:33 तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:09
सूर्यास्त
18:10
चंद्रोदय
12:47
चंद्रास्त
02:12
दिनमान
12h 2m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
फाल्गुन
मास (पूर्णिमांत)
फाल्गुन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शिशिर
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:33 – 05:21
अभिजीत मुहूर्त
11:45 – 12:33 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:09 – 13:40
यमगंड
07:39 – 09:09
गुलिक काल
10:39 – 12:09

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:0907:09दिन
चंद्र07:0908:09दिन
शनि08:0909:09दिन
गुरु09:0910:09दिन
मंगल10:0911:09दिन
सूर्य11:0912:09दिन
शुक्र12:0913:10दिन
बुध13:1014:10दिन
चंद्र14:1015:10दिन
शनि15:1016:10दिन
गुरु16:1017:10दिन
मंगल17:1018:10दिन
सूर्य18:1019:10रात
शुक्र19:1020:10रात
बुध20:1021:10रात
चंद्र21:1022:09रात
शनि22:0923:09रात
गुरु23:0900:09रात
मंगल00:0901:09रात
सूर्य01:0902:08रात
शुक्र02:0803:08रात
बुध03:0804:08रात
चंद्र04:0805:08रात
शनि05:0806:07रात

अयनांश 24.2371° (लाहिड़ी)। समय अयोध्या (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।