2 अक्टूबर 2026 को बर्धमान का चौघड़िया

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026, बर्धमान, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 2 अक्टूबर 2026 को बर्धमान में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण षष्ठी (10:15 तक), नक्षत्र मृगशिरा (02:55, 3 अक्टू॰ तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 05:30 पर और सूर्यास्त 17:25 पर है। राहुकाल 09:58 से 11:27 तक है।

दिन और रात
दिन 05:30 – 17:25
रात 05:30 तक
तिथि
षष्ठी, 10:15 तक
सप्तमी
नक्षत्र
मृगशिरा, 02:55 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

2 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:30 – 06:59सामान्य
लाभ06:59 – 08:29शुभ
अमृत08:29 – 09:58शुभ
काल09:58 – 11:27टालें
शुभ11:27 – 12:57शुभ
रोग12:57 – 14:26टालें
उद्वेग14:26 – 15:55टालें
चर15:55 – 17:25सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग17:25 – 18:55टालें
काल18:55 – 20:26टालें
लाभ20:26 – 21:57शुभ
उद्वेग21:57 – 23:27टालें
शुभ23:27 – 00:58शुभ
अमृत00:58 – 02:29शुभ
चर02:29 – 04:00सामान्य
रोग04:00 – 05:30टालें

2 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण षष्ठी 10:15 तक
कृष्ण सप्तमी 08:00, 3 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मृगशिरा 02:55, 3 अक्टू॰ तक
आर्द्रा 01:29, 4 अक्टू॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 18:17 तक
वरीयान 15:21, 3 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 10:15 तक
विष्टि (भद्रा) 21:07 तक
बव 08:00, 3 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 15:40 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:30
सूर्यास्त
17:25
चंद्रोदय
21:51
चंद्रास्त
11:08
दिनमान
11h 55m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:53 – 04:42
अभिजीत मुहूर्त
11:03 – 11:51

अशुभ समय

राहुकाल
09:58 – 11:27
यमगंड
14:26 – 15:55
गुलिक काल
06:59 – 08:29

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:3006:30दिन
बुध06:3007:29दिन
चंद्र07:2908:29दिन
शनि08:2909:28दिन
गुरु09:2810:28दिन
मंगल10:2811:27दिन
सूर्य11:2712:27दिन
शुक्र12:2713:26दिन
बुध13:2614:26दिन
चंद्र14:2615:26दिन
शनि15:2616:25दिन
गुरु16:2517:25दिन
मंगल17:2518:25रात
सूर्य18:2519:26रात
शुक्र19:2620:26रात
बुध20:2621:27रात
चंद्र21:2722:27रात
शनि22:2723:27रात
गुरु23:2700:28रात
मंगल00:2801:28रात
सूर्य01:2802:29रात
शुक्र02:2903:29रात
बुध03:2904:30रात
चंद्र04:3005:30रात

अयनांश 24.2307° (लाहिड़ी)। समय बर्धमान (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।