28 अक्टूबर 2026 को बर्धमान का चौघड़िया

बुधवार, 28 अक्टूबर 2026, बर्धमान, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 28 अक्टूबर 2026 को बर्धमान में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (01:07, 29 अक्टू॰ तक), नक्षत्र कृत्तिका (13:26 तक) और योग व्यतीपात है। सूर्योदय 05:41 पर और सूर्यास्त 17:02 पर है। राहुकाल 11:22 से 12:47 तक है।

दिन और रात
दिन 05:41 – 17:02
रात 05:42 तक
तिथि
तृतीया, 01:07 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
कृत्तिका, 13:26 तक
रोहिणी
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ05:41 – 07:06शुभ
अमृत07:06 – 08:31शुभ
काल08:31 – 09:57टालें
शुभ09:57 – 11:22शुभ
रोग11:22 – 12:47टालें
उद्वेग12:47 – 14:12टालें
चर14:12 – 15:37सामान्य
लाभ15:37 – 17:02शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग17:02 – 18:37टालें
शुभ18:37 – 20:12शुभ
अमृत20:12 – 21:47शुभ
चर21:47 – 23:22सामान्य
रोग23:22 – 00:57टालें
काल00:57 – 02:32टालें
लाभ02:32 – 04:07शुभ
उद्वेग04:07 – 05:42टालें

28 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 01:07, 29 अक्टू॰ तक
कृष्ण चतुर्थी 22:10, 29 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 11:11, 29 अक्टू॰ तक
योग
व्यतीपातअशुभ 07:18 तक
वरीयान 03:40, 29 अक्टू॰ तक
परिघअशुभ 00:06, 30 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 14:37 तक
विष्टि (भद्रा) 01:07, 29 अक्टू॰ तक
बव 11:37, 29 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:41
सूर्यास्त
17:02
चंद्रोदय
18:41
चंद्रास्त
07:48
दिनमान
11h 21m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:00 – 04:51
अभिजीत मुहूर्त
10:59 – 11:44 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
11:22 – 12:47
यमगंड
07:06 – 08:31
गुलिक काल
09:57 – 11:22

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध05:4106:38दिन
चंद्र06:3807:35दिन
शनि07:3508:31दिन
गुरु08:3109:28दिन
मंगल09:2810:25दिन
सूर्य10:2511:22दिन
शुक्र11:2212:19दिन
बुध12:1913:15दिन
चंद्र13:1514:12दिन
शनि14:1215:09दिन
गुरु15:0916:06दिन
मंगल16:0617:02दिन
सूर्य17:0218:06रात
शुक्र18:0619:09रात
बुध19:0920:12रात
चंद्र20:1221:15रात
शनि21:1522:19रात
गुरु22:1923:22रात
मंगल23:2200:25रात
सूर्य00:2501:29रात
शुक्र01:2902:32रात
बुध02:3203:35रात
चंद्र03:3504:38रात
शनि04:3805:42रात

अयनांश 24.2317° (लाहिड़ी)। समय बर्धमान (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।