19 अक्टूबर 2025 को ब्रह्मपुर (बरहमपुर) का चौघड़िया

रविवार, 19 अक्टूबर 2025, ब्रह्मपुर (बरहमपुर), भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 19 अक्टूबर 2025 को ब्रह्मपुर (बरहमपुर) में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (13:52 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (17:49 तक) और योग इंद्र है। सूर्योदय 05:46 पर और सूर्यास्त 17:24 पर है। राहुकाल 15:57 से 17:24 तक है।

दिन और रात
दिन 05:46 – 17:24
रात 05:46 तक
तिथि
त्रयोदशी, 13:52 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 17:49 तक
हस्त
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

19 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग05:46 – 07:13टालें
चर07:13 – 08:41सामान्य
लाभ08:41 – 10:08शुभ
अमृत10:08 – 11:35शुभ
काल11:35 – 13:02टालें
शुभ13:02 – 14:30शुभ
रोग14:30 – 15:57टालें
उद्वेग15:57 – 17:24टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ17:24 – 18:57शुभ
अमृत18:57 – 20:30शुभ
चर20:30 – 22:03सामान्य
रोग22:03 – 23:35टालें
काल23:35 – 01:08टालें
लाभ01:08 – 02:41शुभ
उद्वेग02:41 – 04:14टालें
शुभ04:14 – 05:46शुभ

19 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 13:52 तक
कृष्ण चतुर्दशी 15:45, 20 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
हस्त 20:16, 20 अक्टू॰ तक
योग
इंद्र 02:04, 20 अक्टू॰ तक
वैधृतिअशुभ 02:34, 21 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 13:52 तक
विष्टि (भद्रा) 02:46, 20 अक्टू॰ तक
शकुनि 15:45, 20 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:46
सूर्यास्त
17:24
चंद्रोदय
03:48
चंद्रास्त
16:04
दिनमान
11h 39m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:07 – 04:57
अभिजीत मुहूर्त
11:12 – 11:58

अशुभ समय

राहुकाल
15:57 – 17:24
यमगंड
11:35 – 13:02
गुलिक काल
14:30 – 15:57

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य05:4606:44दिन
शुक्र06:4407:42दिन
बुध07:4208:41दिन
चंद्र08:4109:39दिन
शनि09:3910:37दिन
गुरु10:3711:35दिन
मंगल11:3512:33दिन
सूर्य12:3313:32दिन
शुक्र13:3214:30दिन
बुध14:3015:28दिन
चंद्र15:2816:26दिन
शनि16:2617:24दिन
गुरु17:2418:26रात
मंगल18:2619:28रात
सूर्य19:2820:30रात
शुक्र20:3021:32रात
बुध21:3222:34रात
चंद्र22:3423:35रात
शनि23:3500:37रात
गुरु00:3701:39रात
मंगल01:3902:41रात
सूर्य02:4103:43रात
शुक्र03:4304:44रात
बुध04:4405:46रात

अयनांश 24.2174° (लाहिड़ी)। समय ब्रह्मपुर (बरहमपुर) (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।