11 अप्रैल 2029 को दावणगेरे का चौघड़िया

बुधवार, 11 अप्रैल 2029, दावणगेरे, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 11 अप्रैल 2029 को दावणगेरे में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (22:15 तक), नक्षत्र पूर्वा भाद्रपद (21:17 तक) और योग ब्रह्म है। सूर्योदय 06:15 पर और सूर्यास्त 18:39 पर है। राहुकाल 12:27 से 14:00 तक है।

दिन और रात
दिन 06:15 – 18:39
रात 06:14 तक
तिथि
त्रयोदशी, 22:15 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
पूर्वा भाद्रपद, 21:17 तक
उत्तरा भाद्रपद
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 अप्रैल 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:15 – 07:48शुभ
अमृत07:48 – 09:21शुभ
काल09:21 – 10:54टालें
शुभ10:54 – 12:27शुभ
रोग12:27 – 14:00टालें
उद्वेग14:00 – 15:33टालें
चर15:33 – 17:06सामान्य
लाभ17:06 – 18:39शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:39 – 20:06टालें
शुभ20:06 – 21:33शुभ
अमृत21:33 – 23:00शुभ
चर23:00 – 00:27सामान्य
रोग00:27 – 01:53टालें
काल01:53 – 03:20टालें
लाभ03:20 – 04:47शुभ
उद्वेग04:47 – 06:14टालें

11 अप्रैल 2029 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 22:15 तक
कृष्ण चतुर्दशी 00:42, 13 अप्रैल तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 00:15, 13 अप्रैल तक
योग
ब्रह्म 01:27, 12 अप्रैल तक
इंद्र 02:22, 13 अप्रैल तक
करण
गर 09:02 तक
वणिज 22:15 तक
विष्टि (भद्रा) 11:28, 12 अप्रैल तक
चंद्र राशि
कुंभ 14:33 तक
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:15
सूर्यास्त
18:39
चंद्रोदय
04:21
चंद्रास्त
16:43
दिनमान
12h 24m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
अधिक चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
अधिक चैत्र
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:42 – 05:28
अभिजीत मुहूर्त
12:02 – 12:52 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:27 – 14:00
यमगंड
07:48 – 09:21
गुलिक काल
10:54 – 12:27

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:1507:17दिन
चंद्र07:1708:19दिन
शनि08:1909:21दिन
गुरु09:2110:23दिन
मंगल10:2311:25दिन
सूर्य11:2512:27दिन
शुक्र12:2713:29दिन
बुध13:2914:31दिन
चंद्र14:3115:33दिन
शनि15:3316:35दिन
गुरु16:3517:37दिन
मंगल17:3718:39दिन
सूर्य18:3919:37रात
शुक्र19:3720:35रात
बुध20:3521:33रात
चंद्र21:3322:31रात
शनि22:3123:29रात
गुरु23:2900:27रात
मंगल00:2701:24रात
सूर्य01:2402:22रात
शुक्र02:2203:20रात
बुध03:2004:18रात
चंद्र04:1805:16रात
शनि05:1606:14रात

अयनांश 24.2660° (लाहिड़ी)। समय दावणगेरे (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।