1 जनवरी 2025 को द्वारका का चौघड़िया

बुधवार, 1 जनवरी 2025, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 1 जनवरी 2025 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल द्वितीया (02:24, 2 जन॰ तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (23:46 तक) और योग व्याघात है। सूर्योदय 07:33 पर और सूर्यास्त 18:21 पर है। राहुकाल 12:57 से 14:18 तक है।

दिन और रात
दिन 07:33 – 18:21
रात 07:33 तक
तिथि
द्वितीया, 02:24 तक
तृतीया
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 23:46 तक
श्रवण
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 जनवरी 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ07:33 – 08:54शुभ
अमृत08:54 – 10:15शुभ
काल10:15 – 11:36टालें
शुभ11:36 – 12:57शुभ
रोग12:57 – 14:18टालें
उद्वेग14:18 – 15:39टालें
चर15:39 – 17:00सामान्य
लाभ17:00 – 18:21शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग18:21 – 20:00टालें
शुभ20:00 – 21:39शुभ
अमृत21:39 – 23:18शुभ
चर23:18 – 00:57सामान्य
रोग00:57 – 02:36टालें
काल02:36 – 04:15टालें
लाभ04:15 – 05:54शुभ
उद्वेग05:54 – 07:33टालें

1 जनवरी 2025 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल द्वितीया 02:24, 2 जन॰ तक
शुक्ल तृतीया 01:08, 3 जन॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 23:10, 2 जन॰ तक
योग
व्याघातअशुभ 17:06 तक
हर्षण 14:57, 2 जन॰ तक
करण
बालव 14:56 तक
कौलव 02:24, 2 जन॰ तक
तैतिल 13:48, 2 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिधनु
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:33
सूर्यास्त
18:21
चंद्रोदय
08:50
चंद्रास्त
19:46
दिनमान
10h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
पौष
विक्रम संवत
2081
शक संवत
1946, क्रोधी संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:47 – 06:40
अभिजीत मुहूर्त
12:36 – 13:19 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:57 – 14:18
यमगंड
08:54 – 10:15
गुलिक काल
11:36 – 12:57

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध07:3308:27दिन
चंद्र08:2709:21दिन
शनि09:2110:15दिन
गुरु10:1511:09दिन
मंगल11:0912:03दिन
सूर्य12:0312:57दिन
शुक्र12:5713:51दिन
बुध13:5114:45दिन
चंद्र14:4515:39दिन
शनि15:3916:33दिन
गुरु16:3317:27दिन
मंगल17:2718:21दिन
सूर्य18:2119:27रात
शुक्र19:2720:33रात
बुध20:3321:39रात
चंद्र21:3922:45रात
शनि22:4523:51रात
गुरु23:5100:57रात
मंगल00:5702:03रात
सूर्य02:0303:09रात
शुक्र03:0904:15रात
बुध04:1505:21रात
चंद्र05:2106:27रात
शनि06:2707:33रात

अयनांश 24.2063° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।