6 अक्टूबर 2025 को द्वारका का चौघड़िया

सोमवार, 6 अक्टूबर 2025, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 6 अक्टूबर 2025 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (12:24 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (04:01, 7 अक्टू॰ तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 06:47 पर और सूर्यास्त 18:37 पर है। राहुकाल 08:15 से 09:44 तक है।

दिन और रात
दिन 06:47 – 18:37
रात 06:47 तक
तिथि
चतुर्दशी, 12:24 तक
पूर्णिमा
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 04:01 तक
रेवती
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

6 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:47 – 08:15शुभ
काल08:15 – 09:44टालें
शुभ09:44 – 11:13शुभ
रोग11:13 – 12:42टालें
उद्वेग12:42 – 14:10टालें
चर14:10 – 15:39सामान्य
लाभ15:39 – 17:08शुभ
अमृत17:08 – 18:37शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:37 – 20:08सामान्य
रोग20:08 – 21:39टालें
काल21:39 – 23:10टालें
लाभ23:10 – 00:42शुभ
उद्वेग00:42 – 02:13टालें
शुभ02:13 – 03:44शुभ
अमृत03:44 – 05:16शुभ
चर05:16 – 06:47सामान्य

6 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 12:24 तक
पूर्णिमा 09:17, 7 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद 04:01, 7 अक्टू॰ तक
रेवती 01:28, 8 अक्टू॰ तक
योग
वृद्धि 13:13 तक
ध्रुव 09:31, 7 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 12:24 तक
विष्टि (भद्रा) 22:53 तक
बव 09:17, 7 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:47
सूर्यास्त
18:37
चंद्रोदय
18:02
चंद्रास्त
05:41
दिनमान
11h 50m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:09 – 05:58
अभिजीत मुहूर्त
12:18 – 13:05

अशुभ समय

राहुकाल
08:15 – 09:44
यमगंड
11:13 – 12:42
गुलिक काल
14:10 – 15:39

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:4707:46दिन
शनि07:4608:45दिन
गुरु08:4509:44दिन
मंगल09:4410:43दिन
सूर्य10:4311:42दिन
शुक्र11:4212:42दिन
बुध12:4213:41दिन
चंद्र13:4114:40दिन
शनि14:4015:39दिन
गुरु15:3916:38दिन
मंगल16:3817:37दिन
सूर्य17:3718:37दिन
शुक्र18:3719:37रात
बुध19:3720:38रात
चंद्र20:3821:39रात
शनि21:3922:40रात
गुरु22:4023:41रात
मंगल23:4100:42रात
सूर्य00:4201:43रात
शुक्र01:4302:43रात
बुध02:4303:44रात
चंद्र03:4404:45रात
शनि04:4505:46रात
गुरु05:4606:47रात

अयनांश 24.2169° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।