13 अक्टूबर 2025 को द्वारका का चौघड़िया

सोमवार, 13 अक्टूबर 2025, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 13 अक्टूबर 2025 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण सप्तमी (12:24 तक), नक्षत्र आर्द्रा (12:27 तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 06:49 पर और सूर्यास्त 18:30 पर है। राहुकाल 08:17 से 09:44 तक है।

दिन और रात
दिन 06:49 – 18:30
रात 06:50 तक
तिथि
सप्तमी, 12:24 तक
अष्टमी
नक्षत्र
आर्द्रा, 12:27 तक
पुनर्वसु
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

13 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:49 – 08:17शुभ
काल08:17 – 09:44टालें
शुभ09:44 – 11:12शुभ
रोग11:12 – 12:40टालें
उद्वेग12:40 – 14:07टालें
चर14:07 – 15:35सामान्य
लाभ15:35 – 17:03शुभ
अमृत17:03 – 18:30शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:30 – 20:03सामान्य
रोग20:03 – 21:35टालें
काल21:35 – 23:07टालें
लाभ23:07 – 00:40शुभ
उद्वेग00:40 – 02:12टालें
शुभ02:12 – 03:45शुभ
अमृत03:45 – 05:17शुभ
चर05:17 – 06:50सामान्य

13 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
कृष्ण सप्तमी 12:24 तक
कृष्ण अष्टमी 11:10, 14 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 11:54, 14 अक्टू॰ तक
योग
परिघअशुभ 08:10 तक
शिव 05:55, 14 अक्टू॰ तक
सिद्ध 04:11, 15 अक्टू॰ तक
करण
बव 12:24 तक
बालव 23:42 तक
कौलव 11:10, 14 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 05:59, 14 अक्टू॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:49
सूर्यास्त
18:30
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
13:19
दिनमान
11h 41m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:11 – 06:00
अभिजीत मुहूर्त
12:16 – 13:03

अशुभ समय

राहुकाल
08:17 – 09:44
यमगंड
11:12 – 12:40
गुलिक काल
14:07 – 15:35

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:4907:48दिन
शनि07:4808:46दिन
गुरु08:4609:44दिन
मंगल09:4410:43दिन
सूर्य10:4311:41दिन
शुक्र11:4112:40दिन
बुध12:4013:38दिन
चंद्र13:3814:37दिन
शनि14:3715:35दिन
गुरु15:3516:33दिन
मंगल16:3317:32दिन
सूर्य17:3218:30दिन
शुक्र18:3019:32रात
बुध19:3220:33रात
चंद्र20:3321:35रात
शनि21:3522:37रात
गुरु22:3723:38रात
मंगल23:3800:40रात
सूर्य00:4001:41रात
शुक्र01:4102:43रात
बुध02:4303:45रात
चंद्र03:4504:46रात
शनि04:4605:48रात
गुरु05:4806:50रात

अयनांश 24.2172° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।