26 अक्टूबर 2025 को द्वारका का चौघड़िया

रविवार, 26 अक्टूबर 2025, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 26 अक्टूबर 2025 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल पंचमी (06:05, 27 अक्टू॰ तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (10:46 तक) और योग अतिगंड है। सूर्योदय 06:55 पर और सूर्यास्त 18:20 पर है। राहुकाल 16:55 से 18:20 तक है।

दिन और रात
दिन 06:55 – 18:20
रात 06:55 तक
तिथि
पंचमी, 06:05 तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 10:46 तक
मूल
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:55 – 08:20टालें
चर08:20 – 09:46सामान्य
लाभ09:46 – 11:12शुभ
अमृत11:12 – 12:37शुभ
काल12:37 – 14:03टालें
शुभ14:03 – 15:29शुभ
रोग15:29 – 16:55टालें
उद्वेग16:55 – 18:20टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:20 – 19:55शुभ
अमृत19:55 – 21:29शुभ
चर21:29 – 23:03सामान्य
रोग23:03 – 00:38टालें
काल00:38 – 02:12टालें
लाभ02:12 – 03:46शुभ
उद्वेग03:46 – 05:21टालें
शुभ05:21 – 06:55शुभ

26 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल पंचमी 06:05, 27 अक्टू॰ तक
शुक्ल षष्ठी 08:00, 28 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
मूल 13:27, 27 अक्टू॰ तक
योग
अतिगंडअशुभ 07:26, 27 अक्टू॰ तक
करण
बव 16:59 तक
बालव 06:05, 27 अक्टू॰ तक
कौलव 19:06, 27 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:55
सूर्यास्त
18:20
चंद्रोदय
11:00
चंद्रास्त
21:39
दिनमान
11h 26m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:14 – 06:04
अभिजीत मुहूर्त
12:15 – 13:00

अशुभ समय

राहुकाल
16:55 – 18:20
यमगंड
12:37 – 14:03
गुलिक काल
15:29 – 16:55

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:5507:52दिन
शुक्र07:5208:49दिन
बुध08:4909:46दिन
चंद्र09:4610:43दिन
शनि10:4311:40दिन
गुरु11:4012:37दिन
मंगल12:3713:35दिन
सूर्य13:3514:32दिन
शुक्र14:3215:29दिन
बुध15:2916:26दिन
चंद्र16:2617:23दिन
शनि17:2318:20दिन
गुरु18:2019:23रात
मंगल19:2320:26रात
सूर्य20:2621:29रात
शुक्र21:2922:32रात
बुध22:3223:35रात
चंद्र23:3500:38रात
शनि00:3801:41रात
गुरु01:4102:44रात
मंगल02:4403:46रात
सूर्य03:4604:49रात
शुक्र04:4905:52रात
बुध05:5206:55रात

अयनांश 24.2177° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।