3 नवंबर 2025 को द्वारका का चौघड़िया

सोमवार, 3 नवंबर 2025, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

सोमवार, 3 नवंबर 2025 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (02:06, 4 नव॰ तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (15:05 तक) और योग हर्षण है। सूर्योदय 06:59 पर और सूर्यास्त 18:15 पर है। राहुकाल 08:23 से 09:48 तक है।

दिन और रात
दिन 06:59 – 18:15
रात 06:59 तक
तिथि
त्रयोदशी, 02:06 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
उत्तरा भाद्रपद, 15:05 तक
रेवती
चौघड़िया
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 नवंबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
अमृत06:59 – 08:23शुभ
काल08:23 – 09:48टालें
शुभ09:48 – 11:12शुभ
रोग11:12 – 12:37टालें
उद्वेग12:37 – 14:02टालें
चर14:02 – 15:26सामान्य
लाभ15:26 – 16:51शुभ
अमृत16:51 – 18:15शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
चर18:15 – 19:51सामान्य
रोग19:51 – 21:26टालें
काल21:26 – 23:02टालें
लाभ23:02 – 00:37शुभ
उद्वेग00:37 – 02:13टालें
शुभ02:13 – 03:48शुभ
अमृत03:48 – 05:24शुभ
चर05:24 – 06:59सामान्य

3 नवंबर 2025 का पंचांग

वारसोमवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 02:06, 4 नव॰ तक
शुक्ल चतुर्दशी 22:36, 4 नव॰ तक
नक्षत्र
रेवती 12:34, 4 नव॰ तक
योग
हर्षण 19:39 तक
वज्रअशुभ 15:42, 4 नव॰ तक
करण
कौलव 15:41 तक
तैतिल 02:06, 4 नव॰ तक
गर 12:24, 4 नव॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशितुला
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:59
सूर्यास्त
18:15
चंद्रोदय
16:32
चंद्रास्त
04:22
दिनमान
11h 17m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
कार्तिक
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:17 – 06:08
अभिजीत मुहूर्त
12:15 – 13:00

अशुभ समय

राहुकाल
08:23 – 09:48
यमगंड
11:12 – 12:37
गुलिक काल
14:02 – 15:26

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
चंद्र06:5907:55दिन
शनि07:5508:52दिन
गुरु08:5209:48दिन
मंगल09:4810:44दिन
सूर्य10:4411:41दिन
शुक्र11:4112:37दिन
बुध12:3713:33दिन
चंद्र13:3314:30दिन
शनि14:3015:26दिन
गुरु15:2616:23दिन
मंगल16:2317:19दिन
सूर्य17:1918:15दिन
शुक्र18:1519:19रात
बुध19:1920:23रात
चंद्र20:2321:26रात
शनि21:2622:30रात
गुरु22:3023:34रात
मंगल23:3400:37रात
सूर्य00:3701:41रात
शुक्र01:4102:45रात
बुध02:4503:48रात
चंद्र03:4804:52रात
शनि04:5205:56रात
गुरु05:5606:59रात

अयनांश 24.2180° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।