16 जनवरी 2026 को द्वारका का चौघड़िया

शुक्रवार, 16 जनवरी 2026, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 16 जनवरी 2026 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (22:22 तक), नक्षत्र मूल (08:12, 17 जन॰ तक) और योग ध्रुव है। सूर्योदय 07:35 पर और सूर्यास्त 18:31 पर है। राहुकाल 11:41 से 13:03 तक है।

दिन और रात
दिन 07:35 – 18:31
रात 07:35 तक
तिथि
त्रयोदशी, 22:22 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
मूल
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

16 जनवरी 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर07:35 – 08:57सामान्य
लाभ08:57 – 10:19शुभ
अमृत10:19 – 11:41शुभ
काल11:41 – 13:03टालें
शुभ13:03 – 14:25शुभ
रोग14:25 – 15:47टालें
उद्वेग15:47 – 17:09टालें
चर17:09 – 18:31सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:31 – 20:09टालें
काल20:09 – 21:47टालें
लाभ21:47 – 23:25शुभ
उद्वेग23:25 – 01:03टालें
शुभ01:03 – 02:41शुभ
अमृत02:41 – 04:19शुभ
चर04:19 – 05:57सामान्य
रोग05:57 – 07:35टालें

16 जनवरी 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 22:22 तक
कृष्ण चतुर्दशी 00:04, 18 जन॰ तक
नक्षत्र
मूल 08:12, 17 जन॰ तक
योग
ध्रुव 21:06 तक
व्याघातअशुभ 21:18, 17 जन॰ तक
करण
गर 09:22 तक
वणिज 22:22 तक
विष्टि (भद्रा) 11:16, 17 जन॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमकर
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
07:35
सूर्यास्त
18:31
चंद्रोदय
05:37
चंद्रास्त
16:17
दिनमान
10h 56m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
पौष
मास (पूर्णिमांत)
माघ
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
हेमंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:51 – 06:43
अभिजीत मुहूर्त
12:42 – 13:25

अशुभ समय

राहुकाल
11:41 – 13:03
यमगंड
15:47 – 17:09
गुलिक काल
08:57 – 10:19

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र07:3508:30दिन
बुध08:3009:25दिन
चंद्र09:2510:19दिन
शनि10:1911:14दिन
गुरु11:1412:09दिन
मंगल12:0913:03दिन
सूर्य13:0313:58दिन
शुक्र13:5814:53दिन
बुध14:5315:47दिन
चंद्र15:4716:42दिन
शनि16:4217:37दिन
गुरु17:3718:31दिन
मंगल18:3119:37रात
सूर्य19:3720:42रात
शुक्र20:4221:47रात
बुध21:4722:53रात
चंद्र22:5323:58रात
शनि23:5801:03रात
गुरु01:0302:09रात
मंगल02:0903:14रात
सूर्य03:1404:19रात
शुक्र04:1905:25रात
बुध05:2506:30रात
चंद्र06:3007:35रात

अयनांश 24.2208° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।