1 अप्रैल 2026 को द्वारका का चौघड़िया

बुधवार, 1 अप्रैल 2026, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

बुधवार, 1 अप्रैल 2026 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल चतुर्दशी (07:06 तक), नक्षत्र उत्तरा फाल्गुनी (16:17 तक) और योग वृद्धि है। सूर्योदय 06:47 पर और सूर्यास्त 19:09 पर है। राहुकाल 12:58 से 14:30 तक है।

दिन और रात
दिन 06:47 – 19:09
रात 06:46 तक
तिथि
पूर्णिमा
नक्षत्र
उत्तरा फाल्गुनी, 16:17 तक
हस्त
चौघड़िया
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 अप्रैल 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
लाभ06:47 – 08:19शुभ
अमृत08:19 – 09:52शुभ
काल09:52 – 11:25टालें
शुभ11:25 – 12:58शुभ
रोग12:58 – 14:30टालें
उद्वेग14:30 – 16:03टालें
चर16:03 – 17:36सामान्य
लाभ17:36 – 19:09शुभ
रात का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग19:09 – 20:36टालें
शुभ20:36 – 22:03शुभ
अमृत22:03 – 23:30शुभ
चर23:30 – 00:57सामान्य
रोग00:57 – 02:24टालें
काल02:24 – 03:51टालें
लाभ03:51 – 05:19शुभ
उद्वेग05:19 – 06:46टालें

1 अप्रैल 2026 का पंचांग

वारबुधवार
तिथि
शुक्ल चतुर्दशी 07:06 तक
पूर्णिमा 07:42, 2 अप्रैल तक
नक्षत्र
हस्त 17:38, 2 अप्रैल तक
योग
वृद्धि 14:50 तक
ध्रुव 14:19, 2 अप्रैल तक
करण
वणिज 07:06 तक
विष्टि (भद्रा) 19:21 तक
बव 07:42, 2 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:47
सूर्यास्त
19:09
चंद्रोदय
18:38
चंद्रास्त
06:06
दिनमान
12h 22m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:14 – 06:00
अभिजीत मुहूर्त
12:33 – 13:22 (बुधवार को पारंपरिक रूप से वर्जित)

अशुभ समय

राहुकाल
12:58 – 14:30
यमगंड
08:19 – 09:52
गुलिक काल
11:25 – 12:58

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
बुध06:4707:48दिन
चंद्र07:4808:50दिन
शनि08:5009:52दिन
गुरु09:5210:54दिन
मंगल10:5411:56दिन
सूर्य11:5612:58दिन
शुक्र12:5814:00दिन
बुध14:0015:01दिन
चंद्र15:0116:03दिन
शनि16:0317:05दिन
गुरु17:0518:07दिन
मंगल18:0719:09दिन
सूर्य19:0920:07रात
शुक्र20:0721:05रात
बुध21:0522:03रात
चंद्र22:0323:01रात
शनि23:0123:59रात
गुरु23:5900:57रात
मंगल00:5701:55रात
सूर्य01:5502:53रात
शुक्र02:5303:51रात
बुध03:5104:50रात
चंद्र04:5005:48रात
शनि05:4806:46रात

अयनांश 24.2237° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।