11 अप्रैल 2026 को द्वारका का चौघड़िया

शनिवार, 11 अप्रैल 2026, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 11 अप्रैल 2026 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (00:38, 12 अप्रैल तक), नक्षत्र उत्तराषाढ़ा (13:40 तक) और योग सिद्ध है। सूर्योदय 06:38 पर और सूर्यास्त 19:12 पर है। राहुकाल 09:46 से 11:21 तक है।

दिन और रात
दिन 06:38 – 19:12
रात 06:37 तक
तिथि
नवमी, 00:38 तक
दशमी
नक्षत्र
उत्तराषाढ़ा, 13:40 तक
श्रवण
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

11 अप्रैल 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल06:38 – 08:12टालें
शुभ08:12 – 09:46शुभ
रोग09:46 – 11:21टालें
उद्वेग11:21 – 12:55टालें
चर12:55 – 14:29सामान्य
लाभ14:29 – 16:04शुभ
अमृत16:04 – 17:38शुभ
काल17:38 – 19:12टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ19:12 – 20:38शुभ
उद्वेग20:38 – 22:03टालें
शुभ22:03 – 23:29शुभ
अमृत23:29 – 00:54शुभ
चर00:54 – 02:20सामान्य
रोग02:20 – 03:46टालें
काल03:46 – 05:11टालें
लाभ05:11 – 06:37शुभ

11 अप्रैल 2026 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण नवमी 00:38, 12 अप्रैल तक
कृष्ण दशमी 01:17, 13 अप्रैल तक
नक्षत्र
श्रवण 15:14, 12 अप्रैल तक
योग
सिद्ध 18:39 तक
साध्य 18:15, 12 अप्रैल तक
करण
तैतिल 12:01 तक
गर 00:38, 12 अप्रैल तक
वणिज 13:03, 12 अप्रैल तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिमीन
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:38
सूर्यास्त
19:12
चंद्रोदय
02:24
चंद्रास्त
13:25
दिनमान
12h 35m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:06 – 05:52
अभिजीत मुहूर्त
12:30 – 13:20

अशुभ समय

राहुकाल
09:46 – 11:21
यमगंड
14:29 – 16:04
गुलिक काल
06:38 – 08:12

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि06:3807:40दिन
गुरु07:4008:43दिन
मंगल08:4309:46दिन
सूर्य09:4610:49दिन
शुक्र10:4911:52दिन
बुध11:5212:55दिन
चंद्र12:5513:58दिन
शनि13:5815:01दिन
गुरु15:0116:04दिन
मंगल16:0417:06दिन
सूर्य17:0618:09दिन
शुक्र18:0919:12दिन
बुध19:1220:09रात
चंद्र20:0921:06रात
शनि21:0622:03रात
गुरु22:0323:00रात
मंगल23:0023:57रात
सूर्य23:5700:54रात
शुक्र00:5401:51रात
बुध01:5102:48रात
चंद्र02:4803:46रात
शनि03:4604:43रात
गुरु04:4305:40रात
मंगल05:4006:37रात

अयनांश 24.2241° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।