18 सितंबर 2026 को द्वारका का चौघड़िया

शुक्रवार, 18 सितंबर 2026, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 18 सितंबर 2026 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल सप्तमी (13:01 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (22:44 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 06:41 पर और सूर्यास्त 18:54 पर है। राहुकाल 11:16 से 12:48 तक है।

दिन और रात
दिन 06:41 – 18:54
रात 06:41 तक
तिथि
सप्तमी, 13:01 तक
अष्टमी
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 22:44 तक
मूल
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

18 सितंबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:41 – 08:13सामान्य
लाभ08:13 – 09:44शुभ
अमृत09:44 – 11:16शुभ
काल11:16 – 12:48टालें
शुभ12:48 – 14:19शुभ
रोग14:19 – 15:51टालें
उद्वेग15:51 – 17:23टालें
चर17:23 – 18:54सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:54 – 20:23टालें
काल20:23 – 21:51टालें
लाभ21:51 – 23:19शुभ
उद्वेग23:19 – 00:48टालें
शुभ00:48 – 02:16शुभ
अमृत02:16 – 03:45शुभ
चर03:45 – 05:13सामान्य
रोग05:13 – 06:41टालें

18 सितंबर 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल सप्तमी 13:01 तक
शुक्ल अष्टमी 15:27, 19 सित॰ तक
नक्षत्र
मूल 01:43, 20 सित॰ तक
योग
प्रीति 13:34 तक
आयुष्मान 14:29, 19 सित॰ तक
करण
वणिज 13:01 तक
विष्टि (भद्रा) 02:13, 19 सित॰ तक
बव 15:27, 19 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:41
सूर्यास्त
18:54
चंद्रोदय
13:08
चंद्रास्त
23:48
दिनमान
12h 13m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:07 – 05:54
अभिजीत मुहूर्त
12:23 – 13:12

अशुभ समय

राहुकाल
11:16 – 12:48
यमगंड
15:51 – 17:23
गुलिक काल
08:13 – 09:44

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:4107:42दिन
बुध07:4208:43दिन
चंद्र08:4309:44दिन
शनि09:4410:46दिन
गुरु10:4611:47दिन
मंगल11:4712:48दिन
सूर्य12:4813:49दिन
शुक्र13:4914:50दिन
बुध14:5015:51दिन
चंद्र15:5116:52दिन
शनि16:5217:53दिन
गुरु17:5318:54दिन
मंगल18:5419:53रात
सूर्य19:5320:52रात
शुक्र20:5221:51रात
बुध21:5122:50रात
चंद्र22:5023:49रात
शनि23:4900:48रात
गुरु00:4801:47रात
मंगल01:4702:46रात
सूर्य02:4603:45रात
शुक्र03:4504:44रात
बुध04:4405:43रात
चंद्र05:4306:41रात

अयनांश 24.2302° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।