4 अक्टूबर 2026 को द्वारका का चौघड़िया

रविवार, 4 अक्टूबर 2026, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 4 अक्टूबर 2026 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण नवमी (03:54, 5 अक्टू॰ तक), नक्षत्र पुनर्वसु (00:14, 5 अक्टू॰ तक) और योग परिघ है। सूर्योदय 06:46 पर और सूर्यास्त 18:39 पर है। राहुकाल 17:09 से 18:39 तक है।

दिन और रात
दिन 06:46 – 18:39
रात 06:46 तक
तिथि
नवमी, 03:54 तक
दशमी
नक्षत्र
पुनर्वसु, 00:14 तक
पुष्य
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

4 अक्टूबर 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:46 – 08:15टालें
चर08:15 – 09:44सामान्य
लाभ09:44 – 11:13शुभ
अमृत11:13 – 12:42शुभ
काल12:42 – 14:11टालें
शुभ14:11 – 15:40शुभ
रोग15:40 – 17:09टालें
उद्वेग17:09 – 18:39टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:39 – 20:10शुभ
अमृत20:10 – 21:40शुभ
चर21:40 – 23:11सामान्य
रोग23:11 – 00:42टालें
काल00:42 – 02:13टालें
लाभ02:13 – 03:44शुभ
उद्वेग03:44 – 05:15टालें
शुभ05:15 – 06:46शुभ

4 अक्टूबर 2026 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
कृष्ण नवमी 03:54, 5 अक्टू॰ तक
कृष्ण दशमी 02:07, 6 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
पुनर्वसु 00:14, 5 अक्टू॰ तक
पुष्य 23:09, 5 अक्टू॰ तक
योग
परिघअशुभ 12:32 तक
शिव 09:51, 5 अक्टू॰ तक
करण
तैतिल 16:51 तक
गर 03:54, 5 अक्टू॰ तक
वणिज 14:59, 5 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मिथुन 18:32 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:46
सूर्यास्त
18:39
चंद्रोदय
00:18
चंद्रास्त
14:20
दिनमान
11h 53m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:09 – 05:57
अभिजीत मुहूर्त
12:18 – 13:06

अशुभ समय

राहुकाल
17:09 – 18:39
यमगंड
12:42 – 14:11
गुलिक काल
15:40 – 17:09

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:4607:45दिन
शुक्र07:4508:45दिन
बुध08:4509:44दिन
चंद्र09:4410:43दिन
शनि10:4311:43दिन
गुरु11:4312:42दिन
मंगल12:4213:42दिन
सूर्य13:4214:41दिन
शुक्र14:4115:40दिन
बुध15:4016:40दिन
चंद्र16:4017:39दिन
शनि17:3918:39दिन
गुरु18:3919:39रात
मंगल19:3920:40रात
सूर्य20:4021:40रात
शुक्र21:4022:41रात
बुध22:4123:42रात
चंद्र23:4200:42रात
शनि00:4201:43रात
गुरु01:4302:44रात
मंगल02:4403:44रात
सूर्य03:4404:45रात
शुक्र04:4505:46रात
बुध05:4606:46रात

अयनांश 24.2308° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।