9 अप्रैल 2027 को द्वारका का चौघड़िया

शुक्रवार, 9 अप्रैल 2027, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 9 अप्रैल 2027 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल तृतीया (01:32, 10 अप्रैल तक), नक्षत्र भरणी (17:11 तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 06:40 पर और सूर्यास्त 19:11 पर है। राहुकाल 11:21 से 12:55 तक है।

दिन और रात
दिन 06:40 – 19:11
रात 06:39 तक
तिथि
तृतीया, 01:32 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
भरणी, 17:11 तक
कृत्तिका
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

9 अप्रैल 2027 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:40 – 08:14सामान्य
लाभ08:14 – 09:48शुभ
अमृत09:48 – 11:21शुभ
काल11:21 – 12:55टालें
शुभ12:55 – 14:29शुभ
रोग14:29 – 16:03टालें
उद्वेग16:03 – 17:37टालें
चर17:37 – 19:11सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:11 – 20:37टालें
काल20:37 – 22:03टालें
लाभ22:03 – 23:29शुभ
उद्वेग23:29 – 00:55टालें
शुभ00:55 – 02:21शुभ
अमृत02:21 – 03:47शुभ
चर03:47 – 05:13सामान्य
रोग05:13 – 06:39टालें

9 अप्रैल 2027 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल तृतीया 01:32, 10 अप्रैल तक
शुक्ल चतुर्थी 23:40, 10 अप्रैल तक
नक्षत्र
भरणी 17:11 तक
कृत्तिका 16:07, 10 अप्रैल तक
योग
प्रीति 00:59, 10 अप्रैल तक
आयुष्मान 22:21, 10 अप्रैल तक
करण
तैतिल 14:23 तक
गर 01:32, 10 अप्रैल तक
वणिज 12:37, 10 अप्रैल तक
चंद्र राशि
मेष 22:56 तक
सूर्य राशिमीन
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:40
सूर्यास्त
19:11
चंद्रोदय
07:55
चंद्रास्त
21:42
दिनमान
12h 32m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
चैत्र
विक्रम संवत
2084
शक संवत
1949, प्लवंग संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:08 – 05:54
अभिजीत मुहूर्त
12:30 – 13:21

अशुभ समय

राहुकाल
11:21 – 12:55
यमगंड
16:03 – 17:37
गुलिक काल
08:14 – 09:48

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:4007:42दिन
बुध07:4208:45दिन
चंद्र08:4509:48दिन
शनि09:4810:50दिन
गुरु10:5011:53दिन
मंगल11:5312:55दिन
सूर्य12:5513:58दिन
शुक्र13:5815:01दिन
बुध15:0116:03दिन
चंद्र16:0317:06दिन
शनि17:0618:09दिन
गुरु18:0919:11दिन
मंगल19:1120:09रात
सूर्य20:0921:06रात
शुक्र21:0622:03रात
बुध22:0323:01रात
चंद्र23:0123:58रात
शनि23:5800:55रात
गुरु00:5501:52रात
मंगल01:5202:50रात
सूर्य02:5003:47रात
शुक्र03:4704:44रात
बुध04:4405:41रात
चंद्र05:4106:39रात

अयनांश 24.2380° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।