1 सितंबर 2028 को द्वारका का चौघड़िया

शुक्रवार, 1 सितंबर 2028, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 1 सितंबर 2028 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल त्रयोदशी (00:35, 2 सित॰ तक), नक्षत्र श्रवण (04:03, 2 सित॰ तक) और योग शोभन है। सूर्योदय 06:37 पर और सूर्यास्त 19:10 पर है। राहुकाल 11:19 से 12:53 तक है।

दिन और रात
दिन 06:37 – 19:10
रात 06:37 तक
तिथि
त्रयोदशी, 00:35 तक
चतुर्दशी
नक्षत्र
श्रवण, 04:03 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

1 सितंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:37 – 08:11सामान्य
लाभ08:11 – 09:45शुभ
अमृत09:45 – 11:19शुभ
काल11:19 – 12:53टालें
शुभ12:53 – 14:28शुभ
रोग14:28 – 16:02टालें
उद्वेग16:02 – 17:36टालें
चर17:36 – 19:10सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग19:10 – 20:36टालें
काल20:36 – 22:02टालें
लाभ22:02 – 23:28शुभ
उद्वेग23:28 – 00:54टालें
शुभ00:54 – 02:19शुभ
अमृत02:19 – 03:45शुभ
चर03:45 – 05:11सामान्य
रोग05:11 – 06:37टालें

1 सितंबर 2028 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल त्रयोदशी 00:35, 2 सित॰ तक
शुक्ल चतुर्दशी 02:52, 3 सित॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 04:03, 2 सित॰ तक
धनिष्ठा 06:55, 3 सित॰ तक
योग
शोभन 23:35 तक
अतिगंडअशुभ 00:24, 3 सित॰ तक
करण
कौलव 11:31 तक
तैतिल 00:35, 2 सित॰ तक
गर 13:42, 2 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिसिंह
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:37
सूर्यास्त
19:10
चंद्रोदय
17:32
चंद्रास्त
04:12
दिनमान
12h 34m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
भाद्रपद
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:05 – 05:51
अभिजीत मुहूर्त
12:28 – 13:18

अशुभ समय

राहुकाल
11:19 – 12:53
यमगंड
16:02 – 17:36
गुलिक काल
08:11 – 09:45

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:3707:39दिन
बुध07:3908:42दिन
चंद्र08:4209:45दिन
शनि09:4510:48दिन
गुरु10:4811:51दिन
मंगल11:5112:53दिन
सूर्य12:5313:56दिन
शुक्र13:5614:59दिन
बुध14:5916:02दिन
चंद्र16:0217:05दिन
शनि17:0518:07दिन
गुरु18:0719:10दिन
मंगल19:1020:07रात
सूर्य20:0721:05रात
शुक्र21:0522:02रात
बुध22:0222:59रात
चंद्र22:5923:56रात
शनि23:5600:54रात
गुरु00:5401:51रात
मंगल01:5102:48रात
सूर्य02:4803:45रात
शुक्र03:4504:42रात
बुध04:4205:40रात
चंद्र05:4006:37रात

अयनांश 24.2575° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।