12 सितंबर 2028 को द्वारका का चौघड़िया

मंगलवार, 12 सितंबर 2028, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

मंगलवार, 12 सितंबर 2028 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण अष्टमी (18:10 तक), नक्षत्र मृगशिरा (02:36, 13 सित॰ तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 06:40 पर और सूर्यास्त 19:00 पर है। राहुकाल 15:55 से 17:27 तक है।

दिन और रात
दिन 06:40 – 19:00
रात 06:40 तक
तिथि
अष्टमी, 18:10 तक
नवमी
नक्षत्र
मृगशिरा, 02:36 तक
आर्द्रा
चौघड़िया
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

12 सितंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
रोग06:40 – 08:12टालें
उद्वेग08:12 – 09:45टालें
चर09:45 – 11:17सामान्य
लाभ11:17 – 12:50शुभ
अमृत12:50 – 14:22शुभ
काल14:22 – 15:55टालें
शुभ15:55 – 17:27शुभ
रोग17:27 – 19:00टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
काल19:00 – 20:27टालें
लाभ20:27 – 21:55शुभ
उद्वेग21:55 – 23:22टालें
शुभ23:22 – 00:50शुभ
अमृत00:50 – 02:17शुभ
चर02:17 – 03:45सामान्य
रोग03:45 – 05:12टालें
काल05:12 – 06:40टालें

12 सितंबर 2028 का पंचांग

वारमंगलवार
तिथि
कृष्ण अष्टमी 18:10 तक
कृष्ण नवमी 17:25, 13 सित॰ तक
नक्षत्र
मृगशिरा 02:36, 13 सित॰ तक
आर्द्रा 02:18, 14 सित॰ तक
योग
सिद्धि 03:08, 13 सित॰ तक
व्यतीपातअशुभ 01:14, 14 सित॰ तक
करण
कौलव 18:10 तक
तैतिल 05:53, 13 सित॰ तक
गर 17:25, 13 सित॰ तक
चंद्र राशि
वृषभ 14:29 तक
सूर्य राशिसिंह
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:40
सूर्यास्त
19:00
चंद्रोदय
इस दिन चंद्रोदय नहीं
चंद्रास्त
13:44
दिनमान
12h 20m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:06 – 05:53
अभिजीत मुहूर्त
12:25 – 13:14

अशुभ समय

राहुकाल
15:55 – 17:27
यमगंड
09:45 – 11:17
गुलिक काल
12:50 – 14:22

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
मंगल06:4007:41दिन
सूर्य07:4108:43दिन
शुक्र08:4309:45दिन
बुध09:4510:46दिन
चंद्र10:4611:48दिन
शनि11:4812:50दिन
गुरु12:5013:51दिन
मंगल13:5114:53दिन
सूर्य14:5315:55दिन
शुक्र15:5516:56दिन
बुध16:5617:58दिन
चंद्र17:5819:00दिन
शनि19:0019:58रात
गुरु19:5820:56रात
मंगल20:5621:55रात
सूर्य21:5522:53रात
शुक्र22:5323:51रात
बुध23:5100:50रात
चंद्र00:5001:48रात
शनि01:4802:46रात
गुरु02:4603:45रात
मंगल03:4504:43रात
सूर्य04:4305:42रात
शुक्र05:4206:40रात

अयनांश 24.2579° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।