24 सितंबर 2028 को द्वारका का चौघड़िया

रविवार, 24 सितंबर 2028, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

रविवार, 24 सितंबर 2028 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल षष्ठी (06:57 तक), नक्षत्र ज्येष्ठा (02:25, 25 सित॰ तक) और योग प्रीति है। सूर्योदय 06:43 पर और सूर्यास्त 18:48 पर है। राहुकाल 17:17 से 18:48 तक है।

दिन और रात
दिन 06:43 – 18:48
रात 06:43 तक
तिथि
सप्तमी, 06:33 तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा, 02:25 तक
मूल
चौघड़िया
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

24 सितंबर 2028 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
उद्वेग06:43 – 08:14टालें
चर08:14 – 09:44सामान्य
लाभ09:44 – 11:15शुभ
अमृत11:15 – 12:45शुभ
काल12:45 – 14:16टालें
शुभ14:16 – 15:47शुभ
रोग15:47 – 17:17टालें
उद्वेग17:17 – 18:48टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
शुभ18:48 – 20:17शुभ
अमृत20:17 – 21:47शुभ
चर21:47 – 23:16सामान्य
रोग23:16 – 00:46टालें
काल00:46 – 02:15टालें
लाभ02:15 – 03:44शुभ
उद्वेग03:44 – 05:14टालें
शुभ05:14 – 06:43शुभ

24 सितंबर 2028 का पंचांग

वाररविवार
तिथि
शुक्ल षष्ठी 06:57 तक
शुक्ल सप्तमी 06:33, 25 सित॰ तक
शुक्ल अष्टमी 06:58, 26 सित॰ तक
नक्षत्र
ज्येष्ठा 02:25, 25 सित॰ तक
मूल 03:21, 26 सित॰ तक
योग
प्रीति 07:08 तक
आयुष्मान 05:43, 25 सित॰ तक
सौभाग्य 04:58, 26 सित॰ तक
करण
तैतिल 06:57 तक
गर 18:38 तक
वणिज 06:33, 25 सित॰ तक
विष्टि (भद्रा) 18:40, 25 सित॰ तक
चंद्र राशि
वृश्चिक 02:25, 25 सित॰ तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:43
सूर्यास्त
18:48
चंद्रोदय
12:25
चंद्रास्त
23:19
दिनमान
12h 5m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2085
शक संवत
1950, कीलक संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:08 – 05:55
अभिजीत मुहूर्त
12:21 – 13:10

अशुभ समय

राहुकाल
17:17 – 18:48
यमगंड
12:45 – 14:16
गुलिक काल
15:47 – 17:17

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
सूर्य06:4307:43दिन
शुक्र07:4308:44दिन
बुध08:4409:44दिन
चंद्र09:4410:45दिन
शनि10:4511:45दिन
गुरु11:4512:45दिन
मंगल12:4513:46दिन
सूर्य13:4614:46दिन
शुक्र14:4615:47दिन
बुध15:4716:47दिन
चंद्र16:4717:47दिन
शनि17:4718:48दिन
गुरु18:4819:47रात
मंगल19:4720:47रात
सूर्य20:4721:47रात
शुक्र21:4722:46रात
बुध22:4623:46रात
चंद्र23:4600:46रात
शनि00:4601:45रात
गुरु01:4502:45रात
मंगल02:4503:44रात
सूर्य03:4404:44रात
शुक्र04:4405:44रात
बुध05:4406:43रात

अयनांश 24.2584° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।