28 सितंबर 2029 को द्वारका का चौघड़िया

शुक्रवार, 28 सितंबर 2029, द्वारका, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 28 सितंबर 2029 को द्वारका में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण पंचमी (09:50 तक), नक्षत्र कृत्तिका (07:42 तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 06:44 पर और सूर्यास्त 18:44 पर है। राहुकाल 11:14 से 12:44 तक है।

दिन और रात
दिन 06:44 – 18:44
रात 06:44 तक
तिथि
पंचमी, 09:50 तक
षष्ठी
नक्षत्र
रोहिणी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

28 सितंबर 2029 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:44 – 08:14सामान्य
लाभ08:14 – 09:44शुभ
अमृत09:44 – 11:14शुभ
काल11:14 – 12:44टालें
शुभ12:44 – 14:14शुभ
रोग14:14 – 15:44टालें
उद्वेग15:44 – 17:14टालें
चर17:14 – 18:44सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:44 – 20:14टालें
काल20:14 – 21:44टालें
लाभ21:44 – 23:14शुभ
उद्वेग23:14 – 00:44टालें
शुभ00:44 – 02:14शुभ
अमृत02:14 – 03:44शुभ
चर03:44 – 05:14सामान्य
रोग05:14 – 06:44टालें

28 सितंबर 2029 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
कृष्ण पंचमी 09:50 तक
कृष्ण षष्ठी 12:04, 29 सित॰ तक
नक्षत्र
रोहिणी 10:29, 29 सित॰ तक
योग
सिद्धि 06:40, 29 सित॰ तक
व्यतीपातअशुभ 07:06, 30 सित॰ तक
करण
तैतिल 09:50 तक
गर 23:00 तक
वणिज 12:04, 29 सित॰ तक
चंद्र राशि
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:44
सूर्यास्त
18:44
चंद्रोदय
22:21
चंद्रास्त
11:20
दिनमान
12h 0m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
भाद्रपद
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2086
शक संवत
1951, सौम्य संवत्सर
ऋतु
वर्षा
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
05:08 – 05:56
अभिजीत मुहूर्त
12:20 – 13:08

अशुभ समय

राहुकाल
11:14 – 12:44
यमगंड
15:44 – 17:14
गुलिक काल
08:14 – 09:44

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:4407:44दिन
बुध07:4408:44दिन
चंद्र08:4409:44दिन
शनि09:4410:44दिन
गुरु10:4411:44दिन
मंगल11:4412:44दिन
सूर्य12:4413:44दिन
शुक्र13:4414:44दिन
बुध14:4415:44दिन
चंद्र15:4416:44दिन
शनि16:4417:44दिन
गुरु17:4418:44दिन
मंगल18:4419:44रात
सूर्य19:4420:44रात
शुक्र20:4421:44रात
बुध21:4422:44रात
चंद्र22:4423:44रात
शनि23:4400:44रात
गुरु00:4401:44रात
मंगल01:4402:44रात
सूर्य02:4403:44रात
शुक्र03:4404:44रात
बुध04:4405:44रात
चंद्र05:4406:44रात

अयनांश 24.2725° (लाहिड़ी)। समय द्वारका (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

सूची में से सबसे नज़दीकी शहर चुनें।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।