26 अप्रैल 2025 को जयपुर का चौघड़िया

शनिवार, 26 अप्रैल 2025, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 26 अप्रैल 2025 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण त्रयोदशी (08:28 तक), नक्षत्र उत्तरा भाद्रपद (06:27 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:52 पर और सूर्यास्त 18:56 पर है। राहुकाल 09:08 से 10:46 तक है।

दिन और रात
दिन 05:52 – 18:56
रात 05:51 तक
तिथि
चतुर्दशी, 04:50 तक
नक्षत्र
रेवती, 03:39 तक
अश्विनी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

26 अप्रैल 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:52 – 07:30टालें
शुभ07:30 – 09:08शुभ
रोग09:08 – 10:46टालें
उद्वेग10:46 – 12:24टालें
चर12:24 – 14:02सामान्य
लाभ14:02 – 15:40शुभ
अमृत15:40 – 17:18शुभ
काल17:18 – 18:56टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ18:56 – 20:18शुभ
उद्वेग20:18 – 21:40टालें
शुभ21:40 – 23:02शुभ
अमृत23:02 – 00:24शुभ
चर00:24 – 01:46सामान्य
रोग01:46 – 03:08टालें
काल03:08 – 04:30टालें
लाभ04:30 – 05:51शुभ

26 अप्रैल 2025 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण त्रयोदशी 08:28 तक
कृष्ण चतुर्दशी 04:50, 27 अप्रैल तक
अमावस्या 01:01, 28 अप्रैल तक
नक्षत्र
रेवती 03:39, 27 अप्रैल तक
अश्विनी 00:38, 28 अप्रैल तक
योग
वैधृतिअशुभ 08:41 तक
विष्कंभअशुभ 04:35, 27 अप्रैल तक
प्रीति 00:19, 28 अप्रैल तक
करण
वणिज 08:28 तक
विष्टि (भद्रा) 18:41 तक
शकुनि 04:50, 27 अप्रैल तक
चतुष्पद 14:56, 27 अप्रैल तक
चंद्र राशि
मीन 03:39, 27 अप्रैल तक
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:52
सूर्यास्त
18:56
चंद्रोदय
04:34
चंद्रास्त
17:27
दिनमान
13h 4m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:25 – 05:08
अभिजीत मुहूर्त
11:58 – 12:50

अशुभ समय

राहुकाल
09:08 – 10:46
यमगंड
14:02 – 15:40
गुलिक काल
05:52 – 07:30

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:5206:58दिन
गुरु06:5808:03दिन
मंगल08:0309:08दिन
सूर्य09:0810:14दिन
शुक्र10:1411:19दिन
बुध11:1912:24दिन
चंद्र12:2413:30दिन
शनि13:3014:35दिन
गुरु14:3515:40दिन
मंगल15:4016:46दिन
सूर्य16:4617:51दिन
शुक्र17:5118:56दिन
बुध18:5619:51रात
चंद्र19:5120:46रात
शनि20:4621:40रात
गुरु21:4022:35रात
मंगल22:3523:29रात
सूर्य23:2900:24रात
शुक्र00:2401:18रात
बुध01:1802:13रात
चंद्र02:1303:08रात
शनि03:0804:02रात
गुरु04:0204:57रात
मंगल04:5705:51रात

अयनांश 24.2107° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।