3 अक्टूबर 2025 को जयपुर का चौघड़िया

शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2025, जयपुर, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 3 अक्टूबर 2025 को जयपुर में सूर्योदय के समय तिथि शुक्ल एकादशी (18:33 तक), नक्षत्र श्रवण (09:34 तक) और योग धृति है। सूर्योदय 06:20 पर और सूर्यास्त 18:11 पर है। राहुकाल 10:46 से 12:15 तक है।

दिन और रात
दिन 06:20 – 18:11
रात 06:20 तक
तिथि
एकादशी, 18:33 तक
द्वादशी
नक्षत्र
श्रवण, 09:34 तक
धनिष्ठा
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

3 अक्टूबर 2025 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर06:20 – 07:49सामान्य
लाभ07:49 – 09:18शुभ
अमृत09:18 – 10:46शुभ
काल10:46 – 12:15टालें
शुभ12:15 – 13:44शुभ
रोग13:44 – 15:13टालें
उद्वेग15:13 – 16:42टालें
चर16:42 – 18:11सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:11 – 19:42टालें
काल19:42 – 21:13टालें
लाभ21:13 – 22:44शुभ
उद्वेग22:44 – 00:15टालें
शुभ00:15 – 01:47शुभ
अमृत01:47 – 03:18शुभ
चर03:18 – 04:49सामान्य
रोग04:49 – 06:20टालें

3 अक्टूबर 2025 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
शुक्ल एकादशी 18:33 तक
शुक्ल द्वादशी 17:09, 4 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
श्रवण 09:34 तक
धनिष्ठा 09:09, 4 अक्टू॰ तक
योग
धृति 21:45 तक
शूलअशुभ 19:26, 4 अक्टू॰ तक
करण
वणिज 06:58 तक
विष्टि (भद्रा) 18:33 तक
बव 05:57, 4 अक्टू॰ तक
बालव 17:09, 4 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मकर 21:27 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षशुक्ल पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
06:20
सूर्यास्त
18:11
चंद्रोदय
15:50
चंद्रास्त
02:04
दिनमान
11h 51m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
आश्विन
विक्रम संवत
2082
शक संवत
1947, विश्वावसु संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:43 – 05:31
अभिजीत मुहूर्त
11:51 – 12:39

अशुभ समय

राहुकाल
10:46 – 12:15
यमगंड
15:13 – 16:42
गुलिक काल
07:49 – 09:18

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र06:2007:19दिन
बुध07:1908:18दिन
चंद्र08:1809:18दिन
शनि09:1810:17दिन
गुरु10:1711:16दिन
मंगल11:1612:15दिन
सूर्य12:1513:14दिन
शुक्र13:1414:14दिन
बुध14:1415:13दिन
चंद्र15:1316:12दिन
शनि16:1217:11दिन
गुरु17:1118:11दिन
मंगल18:1119:11रात
सूर्य19:1120:12रात
शुक्र20:1221:13रात
बुध21:1322:14रात
चंद्र22:1423:15रात
शनि23:1500:15रात
गुरु00:1501:16रात
मंगल01:1602:17रात
सूर्य02:1703:18रात
शुक्र03:1804:19रात
बुध04:1905:19रात
चंद्र05:1906:20रात

अयनांश 24.2168° (लाहिड़ी)। समय जयपुर (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।