15 अक्टूबर 2011 को पटना का चौघड़िया

शनिवार, 15 अक्टूबर 2011, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शनिवार, 15 अक्टूबर 2011 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि कृष्ण तृतीया (15:05 तक), नक्षत्र कृत्तिका (03:49, 16 अक्टू॰ तक) और योग सिद्धि है। सूर्योदय 05:47 पर और सूर्यास्त 17:22 पर है। राहुकाल 08:41 से 10:08 तक है।

दिन और रात
दिन 05:47 – 17:22
रात 05:48 तक
तिथि
तृतीया, 15:05 तक
चतुर्थी
नक्षत्र
कृत्तिका, 03:49 तक
रोहिणी
चौघड़िया
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
लाभ
अमृत
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
काल
लाभ
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

15 अक्टूबर 2011 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
काल05:47 – 07:14टालें
शुभ07:14 – 08:41शुभ
रोग08:41 – 10:08टालें
उद्वेग10:08 – 11:35टालें
चर11:35 – 13:02सामान्य
लाभ13:02 – 14:28शुभ
अमृत14:28 – 15:55शुभ
काल15:55 – 17:22टालें
रात का चौघड़ियासमयफल
लाभ17:22 – 18:55शुभ
उद्वेग18:55 – 20:29टालें
शुभ20:29 – 22:02शुभ
अमृत22:02 – 23:35शुभ
चर23:35 – 01:08सामान्य
रोग01:08 – 02:41टालें
काल02:41 – 04:15टालें
लाभ04:15 – 05:48शुभ

15 अक्टूबर 2011 का पंचांग

वारशनिवार
तिथि
कृष्ण तृतीया 15:05 तक
कृष्ण चतुर्थी 17:17, 16 अक्टू॰ तक
नक्षत्र
कृत्तिका 03:49, 16 अक्टू॰ तक
रोहिणी 06:22, 17 अक्टू॰ तक
योग
सिद्धि 18:50 तक
व्यतीपातअशुभ 19:28, 16 अक्टू॰ तक
करण
विष्टि (भद्रा) 15:05 तक
बव 04:13, 16 अक्टू॰ तक
बालव 17:17, 16 अक्टू॰ तक
चंद्र राशि
मेष 07:43 तक
सूर्य राशिकन्या
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:47
सूर्यास्त
17:22
चंद्रोदय
19:20
चंद्रास्त
08:23
दिनमान
11h 35m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
आश्विन
मास (पूर्णिमांत)
कार्तिक
विक्रम संवत
2068
शक संवत
1933, खर संवत्सर
ऋतु
शरद
अयन
दक्षिणायन

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
04:08 – 04:58
अभिजीत मुहूर्त
11:12 – 11:58

अशुभ समय

राहुकाल
08:41 – 10:08
यमगंड
13:02 – 14:28
गुलिक काल
05:47 – 07:14

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शनि05:4706:45दिन
गुरु06:4507:43दिन
मंगल07:4308:41दिन
सूर्य08:4109:39दिन
शुक्र09:3910:37दिन
बुध10:3711:35दिन
चंद्र11:3512:33दिन
शनि12:3313:30दिन
गुरु13:3014:28दिन
मंगल14:2815:26दिन
सूर्य15:2616:24दिन
शुक्र16:2417:22दिन
बुध17:2218:24रात
चंद्र18:2419:26रात
शनि19:2620:29रात
गुरु20:2921:31रात
मंगल21:3122:33रात
सूर्य22:3323:35रात
शुक्र23:3500:37रात
बुध00:3701:39रात
चंद्र01:3902:41रात
शनि02:4103:43रात
गुरु03:4304:46रात
मंगल04:4605:48रात

अयनांश 24.0217° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

किसी अन्य शहर का चौघड़िया

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।