17 अप्रैल 2026 को पटना का चौघड़िया

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026, पटना, भारत। समय Asia/Kolkata में है।

शुक्रवार, 17 अप्रैल 2026 को पटना में सूर्योदय के समय तिथि अमावस्या (17:21 तक), नक्षत्र रेवती (12:02 तक) और योग वैधृति है। सूर्योदय 05:25 पर और सूर्यास्त 18:13 पर है। राहुकाल 10:13 से 11:49 तक है।

दिन और रात
दिन 05:25 – 18:13
रात 05:24 तक
तिथि
अमावस्या, 17:21 तक
प्रतिपदा
नक्षत्र
रेवती, 12:02 तक
अश्विनी
चौघड़िया
चर
लाभ
अमृत
काल
शुभ
रोग
उद्वेग
चर
रोग
काल
लाभ
उद्वेग
शुभ
अमृत
चर
रोग
राहुकाल, यमगंड और गुलिक
राहु
यम
गुलिक
अभिजीत और ब्रह्म मुहूर्त

17 अप्रैल 2026 का चौघड़िया

चौघड़िया दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) को आठ-आठ भागों में बांटता है। अमृत, शुभ और लाभ कार्य शुरू करने के लिए अच्छे हैं; चर यात्रा के लिए अच्छा है; उद्वेग, काल और रोग में नई शुरुआत से बचना बेहतर है।

दिन का चौघड़ियासमयफल
चर05:25 – 07:01सामान्य
लाभ07:01 – 08:37शुभ
अमृत08:37 – 10:13शुभ
काल10:13 – 11:49टालें
शुभ11:49 – 13:25शुभ
रोग13:25 – 15:01टालें
उद्वेग15:01 – 16:37टालें
चर16:37 – 18:13सामान्य
रात का चौघड़ियासमयफल
रोग18:13 – 19:37टालें
काल19:37 – 21:01टालें
लाभ21:01 – 22:24शुभ
उद्वेग22:24 – 23:48टालें
शुभ23:48 – 01:12शुभ
अमृत01:12 – 02:36शुभ
चर02:36 – 04:00सामान्य
रोग04:00 – 05:24टालें

17 अप्रैल 2026 का पंचांग

वारशुक्रवार
तिथि
अमावस्या 17:21 तक
शुक्ल प्रतिपदा 14:11, 18 अप्रैल तक
नक्षत्र
रेवती 12:02 तक
अश्विनी 09:42, 18 अप्रैल तक
योग
वैधृतिअशुभ 07:21 तक
विष्कंभअशुभ 03:45, 18 अप्रैल तक
प्रीति 23:56, 18 अप्रैल तक
करण
चतुष्पद 06:50 तक
नाग 17:21 तक
किंस्तुघ्न 03:48, 18 अप्रैल तक
बव 14:11, 18 अप्रैल तक
चंद्र राशि
मीन 12:02 तक
सूर्य राशिमेष
पक्षकृष्ण पक्ष

सूर्य और चंद्रमा

सूर्योदय
05:25
सूर्यास्त
18:13
चंद्रोदय
04:56
चंद्रास्त
18:12
दिनमान
12h 48m

हिंदू कैलेंडर

मास (अमांत)
चैत्र
मास (पूर्णिमांत)
वैशाख
विक्रम संवत
2083
शक संवत
1948, पराभव संवत्सर
ऋतु
वसंत
अयन
उत्तरायण

शुभ समय

ब्रह्म मुहूर्त
03:55 – 04:40
अभिजीत मुहूर्त
11:23 – 12:14

अशुभ समय

राहुकाल
10:13 – 11:49
यमगंड
15:01 – 16:37
गुलिक काल
07:01 – 08:37

होरा (ग्रहों के घंटे)

हर होरा दिन या रात का बारहवां भाग होता है और उस पर एक ग्रह का शासन होता है; सूर्योदय पर पहला होरा वार के स्वामी का होता है। किसी ग्रह के होरा का उपयोग उसके कारक कार्यों के लिए करें — पढ़ाई के लिए गुरु, कला के लिए शुक्र, व्यापार के लिए बुध।

होरा स्वामीसेतकदिन / रात
शुक्र05:2506:29दिन
बुध06:2907:33दिन
चंद्र07:3308:37दिन
शनि08:3709:41दिन
गुरु09:4110:45दिन
मंगल10:4511:49दिन
सूर्य11:4912:53दिन
शुक्र12:5313:57दिन
बुध13:5715:01दिन
चंद्र15:0116:05दिन
शनि16:0517:09दिन
गुरु17:0918:13दिन
मंगल18:1319:09रात
सूर्य19:0920:05रात
शुक्र20:0521:01रात
बुध21:0121:56रात
चंद्र21:5622:52रात
शनि22:5223:48रात
गुरु23:4800:44रात
मंगल00:4401:40रात
सूर्य01:4002:36रात
शुक्र02:3603:32रात
बुध03:3204:28रात
चंद्र04:2805:24रात

अयनांश 24.2243° (लाहिड़ी)। समय पटना (Asia/Kolkata) के स्थानीय हैं।

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अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

चौघड़िया क्या है?

चौघड़िया समय देखने की एक वैदिक पद्धति है, जो गुजरात और राजस्थान में लोकप्रिय है। इसमें दिन और रात को आठ-आठ भागों में बाँटा जाता है। हर भाग का स्वामी एक ग्रह होता है और उसका नाम अमृत, शुभ, लाभ, चर, उद्वेग, काल या रोग होता है।

कौन-सा चौघड़िया सबसे अच्छा है?

अमृत, शुभ और लाभ नए काम की शुरुआत, दस्तावेज़ों पर हस्ताक्षर और खरीदारी के लिए शुभ माने जाते हैं। चर यात्रा के लिए अच्छा है। उद्वेग, काल और रोग में परंपरागत रूप से नई शुरुआत से बचा जाता है।

चौघड़िया का समय हर दिन अलग क्यों होता है?

ये अवधियाँ आपके स्थान पर वास्तविक दिन (सूर्योदय से सूर्यास्त) और रात (सूर्यास्त से अगले सूर्योदय) का आठवाँ भाग होती हैं, इसलिए साल भर सूर्योदय और सूर्यास्त के साथ बदलती रहती हैं।

क्या चौघड़िया और राहु काल एक ही हैं?

नहीं। राहु काल हर दिन एक अशुभ अवधि है। चौघड़िया दिन और रात की सभी सोलह अवधियों का मूल्यांकन करता है।